अस्पतालो का प्रबंधन अब एम बी ए के हवाले करने की तैयारी,अधिकारों की टकराहट निश्चित!

कौटिल्य वार्ता
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बस्ती/उत्तरप्रदेश


 उत्तर प्रदेश के चिकित्सालयों में निरंतर प्रशासनिक अफरा-तफरी के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है इस फैसले के तहत प्रशाशन अब  जिम्मेदार एमबीए पास युवाओं के हाथ में जाएगा .

 जल्द ही एमबीए पास युवकों को सरकारी नौकरी अस्पतालों में मिलने की उम्मीद बन गई है मुख्यमंत्री योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथने टीम 9 के तहत फैसला लिया है . डॉक्टरों से केवल इलाज करवाने का काम लिया जाएगा . स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा विभाग में अलग अस्पतालों या कार्यालयों में जहां डॉक्टरों की तैनाती प्रशासनिक प्रबंधन

 की कार्यों में की जाती है वहां सभी डॉक्टरों के उन्हें तत्काल कार्यमुक्त किया जाएगा . इन लोगों को चिकित्सकीय कार्य में लगाया जाए 

प्रबंधन के कार्यों के लिए आवश्यकतानुसार एमबीए पास युवाओं को लगाना चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि कोकोरोना की कम होने में गतिविधियां धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं .अस्पतालों में ओपीडी और ओपीडी सेवाएं सर्जरी आदि शुरू हो गई हैं. लेकिन वही अस्पतालों में आए दिन स्थितियां गंभीर भी हैं ,घर से बाहर कम से कम निकलने के लिए भी उन्होंने आग्रह किया 

 सभी मेडिकल कॉलेजों में, जिला स्तरीय चिकित्सालय में कंसल्टेशन की व्यवस्था को उन्होंने बेहतर बता अधिकांश डॉक्टरों को इससे जोड़ने के लिए आग्रह भी किया उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में कोरोना काल में सारे स्वास्थ्य कर्मियों ने जमकर मेहनत किया और अपने को बचाते हुए समाज सेवा में पूरी टीम को लगा दिया .आने वाले दिनों में स्वास्थ्य कर्मियों के लिए एक और कठिन परिस्थिति होगी उनके SIc CMO वहां का प्रशासन न  करके केवल दवा का काम करेंगे .प्राइवेट सेक्टर के युवाओं से अस्पताल का प्रबंधन कराया जाएगा, विशेषज्ञों के अनुसार अधिकारों के टकराहट की संभावना बढ़ सकती है .उच्च शिक्षा प्राप्त डॉक्टर एम बी ए के प्रबंधन में का करेगे शायद अव्यवहारिकता को आमंत्रण है. विद्यार्थियों के संरक्षण में कैसे काम करेंगे उनकी देखरेख में काम करेंगे अधिकारों की टकराहट भी होंगी..

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