गोरखपुर जेल में सैकड़ों कैदी गीता रामायण के पाठ से अपना जीवन सशक्त रूप से बदल रहे हैं

कौटिल्य वार्ता
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वशिष्ठ नगर,बस्ती

 जब व्यक्ति  सकारात्मक ऊर्जा से पर पूर्ण होता है तब उसके शरीर में सकारात्मकता का वास भी होने लगता है। गोरखपुर जिला जेल में ऐसे सैकड़ों कैदी हैं जिनको


अपने गलतियों पर पश्चाताप हो रहा है ।खुद दो कदम आगे बढ़कर राम मंदिर निर्माण के बाद से अपने हृदय में परिवर्तन कर चुके हैं ।उनका परिवर्तन इस तरह से हो रहा है कि वह उठने के बाद गीता का पाठ करते हैं और रात्रि में रामचरितमानस का।

  600 से अधिक बंदी गोरखपुर जिला जेल में गीता और रामचरितमानस का पाठ कर जेल का माहौल सकारात्मक बना दिए । उनका कहना है कि गीता जीवन दर्शन है "यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत "हम  उसी में निरंतर और रमें रहते हैं । उन्होंने अपने अनुभव में साझा किया के काम क्रोध मोह को माया के बंधनों से मुक्त होने के लिए धार्मिक साहित्य सबसे बड़ा साधन है। जेल के बंदी प्रायश्चित स्वरूप आजकल सकारात्मक रास्ते पर हैं 75 और कैदी है


जिन्होंने गीता पुस्तक की डिमांड कर रही है। गोरखपुर जेल की अधीक्षक दिलीप पांडे का कहना है इस वक्त गोरखपुर जेल में 450 सजायाफ़्ता बंदी हैं । कई लोग तो ऐसे जिनसे मिलने कभी कोई नहीं आता ।वह भगवत गीता पड़कर अपना मानसिक तनाव कम करते हैं।

 2000 से करीब बंदियो में 6० से अधिक बंधिया को कभी कोई मिलने नहीं आता ।गीता और रामचरितमानस से अपना समय काट रहे हैं और मानसिक संताप दूर हो रहा है  यही उनकी सहचर और रात्रि में उनको नींद भी अच्छी आती है ।कई कैदियों का कहना है गीता हमारे लिए भगवान की भूमिका में है।


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