बस्ती के महत्वाकाक्षी मुस्लिम नेता मो अकरम ने की आत्म हत्या

 बस्ती


बस्ती जनपद के अति महत्वाकांक्षी मुस्लिम नेता, सभी दलों में समान अधिकार से काम करा ने का महारत हासिल करने वाले बेगम खैर इंटरमीडिएट कॉलेज के मुतवल्ली मोहम्मद अकरम ने कल अपने मुरली जोत आवास पर अपनी सर्विस श्रीवल्ली से कनपटी पर दाग कर आत्महत्या कर लिया.

 बताते हैं कि मोहम्मद अकरम सत्ता न्यायपालिका और कार्यपालिका में समान रूप से अपने रसूख को कायम किए हुए था उसके दिमाग में सदा किसी भी तरह से सफलता हासिल करना उसका लक्ष्य था और अधिकतम 10 वर्षों में जनपद में सभी जनप्रतिनिधियों का सत्ता के चक्र के हिसाब से चहोता बनने वाला अकरम जिसने करोड़ों रुपए लोगों की देनदारी थी इस बीच में ट्रस्ट से हटाए जाने के बाद भी पैसे की वसूली जारी थी. नौकरी और दुकान के नाम पर करोड़ों रुपए इकट्ठा करने वाले मोहम्मद अकरम और जल्दी ही अपने बेटे की उम्र के बराबर की मुस्लिम कन्या से दूसरी शादी करने वाले अकरम नेपाल मुंबई लखनऊ दिल्ली और जिला प्रशासन और न्यायिक गतिविधियों में अपने रासो के लिए जाना जाता था ,और अवसाद ग्रस्त भी.

करोना काल में उसने प्रशासन की निगाह में अच्छा प्रदर्शन भी किया था, इधर तमाम अवसादों के चलते भाग करके वह दिल्ली रहा करता था कभी लखनऊ कभी दिल्ली कभी मुंबई उसका जीवन था.

 असंख्य लोग से पैसा लेकर के दुकान, मकान और नौकरी के नाम पर काफी धन इकट्ठा कर लिया था. बताते हैं की इसी महत्वाकांक्षा के चलते अंततः महत्वाकांक्षा ने ही उसकी जान ले लिया .चारों ओर से टोकापीटोकी और देनदारी से अजीज होकर के संभव  है उसने अपनीएह लीला समाप्त कर ली.

 उभरते हुए समाजसेवी के रूप में तमाम विवादों से उसका पुराना रिश्ता ,सत्ता प्रतिष्ठान का करीबी और सत्ता के सहारे खैर ट्रस्ट को हथियाना का भी भी उसकी सफलताओं में एक चरण है .पद के दुरुपयोग त्रस्त के दुरुपयोग और गलत इंटरप्रिटेशन उसका स्वभाव था. बेगम खैर का प्रबंधन रहते हुए ट्रस्ट नंबर 38 के विवाद को लेकर के खैर के प्रबंधक बब्बू खान से भी आए दिन उसके विवाद हुआ करते थे .थाना, कोर्ट ,कचहरी खेल-खेल में अपने न्यायिक पहुंच का लाभ उठाने का उसको महारत हासिल था.

 पर आज न न्यायपालिका और  न विधायिका काम और ना ही सत्ता प्रतिष्ठान का कोई वह नेता जो उसे सत्ता के करीब लाने में मेडिएटर की भूमिका निभाता था  कोई काम नहीं आया.वह भी विवादों से नाता रखने वाला अकरम और अपनी आत्महत्या कर सारे विवादों का पटाक्षेप कर गया.

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