आशा वर्कर शहरी क्षेत्र मे भी नवजात शिशुओ की घरो तक कुशल क्षेम जानेगी

कौटिल्य वार्ता
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 *शहरी क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता भी नवजात के घर सात बार करेंगी भ्रमण*


-    नवजात मृत्‍यु के मामलों को कम करने के लिए दिया गया प्रशिक्षण

-    मगहर और खलीलाबाद अरबन क्षेत्र से जुड़ी आशा कार्यकर्ता रहीं शामिल


संतकबीरनगर, 



जिले के शहरी क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता भी अब 42 दिन में सात बार नवजात के घर भ्रमण कर सकेंगी, ताकि नवजात मृत्‍यु के मामलों को कम किया जा सके। इसके लिए इन आशा कार्यकर्ताओं को एचबीएनसी ( होम बेस्‍ड न्‍यू बार्न केयर ) का विशेष प्रशिक्षणदिया गया है। इसमें मगहर और खलीलाबाद अरबन क्षेत्र से जुड़ी आशा कार्यकर्ता शामिल हैं।


यह जानकारी देते हुए अपर मुख्‍य चिकित्‍सा अधिकारी डॉ मोहन झा ने बताया कि नवजात शिशुओं की मृत्‍यु के मामलों को कम करने के लिए पूरे जनपद में एचबीएनसी कार्यक्रम चलाया जा रहा है। अभी तक नगरीय क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं को इसका प्रशिक्षण नहीं प्राप्‍त हुआ था। प्रशिक्षण पूर्ण हो जाने के बाद शहरी क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता भी अब गृह भ्रमण करके नवजात की निगरानी कर सकेंगी। सभी40 शहरी आशा कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण पूरा हो गया है। उन्होंने कहा किआशा क्षेत्र में जाकर प्रशिक्षण का उपयोग करें। सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र खलीलाबाद के सभागार में प्रशिक्षण के उपरान्‍त शहरी स्‍वास्‍थ्‍य के जिला समन्‍वयक सुरजीत सिंह, एचईओ विनोद जायसवाल तथा यूनीसेफ के मंडल समन्‍वयक प्रेम प्रकाश शुक्‍ला ने प्रशिक्षण प्राप्‍त करने वाली आशा कार्यकर्ताओं को प्रमाण पत्र प्रदान किया। बगहिया की आशा कार्यकर्ता पूनम बताती हैं कि प्रशिक्षण के दौरान उन्‍हें बेहतर जानकारी प्राप्‍त हुई है। अब वह 42 दिन में सात बार तक भ्रमण करके नवजात की असमय मृत्‍यु को रोकने का काम करेंगी। मगहर की आशा कार्यकर्ता कनीज फातिमा बताती हैं कि बच्‍चों के स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर बेहतर जानकारियां मिली हैं, जो हमें आगे काम आएंगी।


*बीमार बच्‍चों के लक्षणों के बारे में दी जानकारी*


प्रशिक्षण के दौरान यूनीसेफ के मंडल समन्‍वयक सुरेन्‍द्र शुक्‍ला ने आशा कार्यकर्ताओं को बीमार बच्‍चों के लक्षणों के बारे में जानकारी प्रदान की। उन्‍होने बताया कि आशा कार्यकर्ता हर विजिट के दौरान बच्‍चों का वजन, तापमान, त्‍वचा के बदलते रंग के बारे में जानकारी ले। अगर कोई ऐसा बदलाव हो जो सामान्‍य से अलग हो तो बच्‍चे को तुरन्‍त ही एंबुलेंस के जरिए अस्‍पताल पहुंचे। नवजात की मां और उसके लिए आपातकालीन एंबुलेंस की सेवा हर समय तैयार रहती है।


*नवजात शि‍शुओं की मृत्‍यु के पांच प्रमुख कारण*


प्रशिक्षण देते हुए स्‍वास्‍थ्‍य शिक्षा अधिकारी विनोद जायसवाल ने कहा कि लैंसेट मिलियन डेथ स्‍टडी के आंकड़े बताते हैं कि नवजात की मौत कुल पांच कारणों के चलते होती है। इस तरह की होने वाली मौतों में प्री- टर्म डिलिवरी से 35 प्रतिशत, जन्‍म के उपरान्‍त श्‍वांस अवरुद्ध होने के 20 प्रतिशत , निमोनिया से 16 प्रतिशत, जन्‍मजात विकृतियों से 9 प्रतिशत तथा सेप्सिस ( संक्रमण ) के चलते 15 प्रतिशत शिशुओं की मौत होती है। इसलिए इन कारणों पर ध्‍यान देने की आवश्‍यकता होती है। इसलिए नवजात शि‍शुओं को गहन निगरानी की जरुरत होती है। आशा कार्यकर्ता नवजात शिशुओं के घर जन्‍म के पहले, तीसरे, सातवें, 14 वें, 21वें, 28 वें और 42 वें दिन जाकर शिशुओं की निगरानी करती रहें। इस दौरान उन्‍होंने शिशुओं के लक्षणों के बारे में जानकारी भी दी।

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