सड़क बनते कब्रगाह, 2022 में यूपी के 20 जिलों में 9011 लोगों की मौत, कानपुर में 618 तो लखनऊ में 482 की मौत!

कौटिल्य वार्ता
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 सड़क बनते कब्रगाह, 2022 में यूपी के 20 जिलों में 9011 लोगों की मौत, कानपुर में 618 तो लखनऊ में 482 की मौत!

मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ। 


यूपी में ओवरस्पीड लोगों की जिंदगियों पर ब्रेक लगा रही है। परिवहन विभाग की ओर से ऐसे 20 जिलों के हादसों के आंकड़े जारी किए गए हैं, जहां पिछले तीन वर्षों में सर्वाधिक हादसे हुए हैं। राजधानी लखनऊ में 482 मौतें हुई हैं, जबकि कानपुर 618 की संख्या के साथ टॉप पर है। इस समय प्रदेश में सड़क सुरक्षा माह मनाया जा रहा है। जिसके कारण जगह-जगह जागरुकता अभियान चलाए जा रहे हैं। पर, यह सिर्फ कागजी खानापूर्ति बन कर रह गई है। न अफसरों की संजीदगी दिखती है, न ही लोग जागरुक हो रहे हैं। यही वजह है कि यातायात नियमों का उल्लंघन बढ़ता जा रहा है। प्रदेश के 75 जिलों में अकेले इन्हीं 20 जनपदों में मौतों का आंकड़ा 43 फीसद है।

उत्तर प्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर काम करने वाली सबसे बड़ी सामाजिक संस्था "शुभम सोती फाउंडेशन" के अध्यक्ष आशुतोष सोती के अनुसार लोग नियमों का मखौल उड़ा रहे हैं।परिणाम उन्हें जान से हाथ धोना पड़ रहा है। सड़क हादसों में होने वाली मौतों का आंकड़ा घटने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है।बता दें कि शुभम सोती फाउंडेशन प्रति वर्ष स्कूल-स्कूल घूम कर बच्चों को न सिर्फ ट्रैफिक नियमों की जानकारी देता है बल्कि उन्हें सुरक्षित रखने के लिये हजारों हेलमेट बंटता है। आशुतोष सोती का मानना है कि स्कूलों में ट्रैफिक जागरूकता का पाठ्यक्रम लागू किया जाय तो सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु में कमी हो सकती है। वर्ष 2022 के आंकड़ें देखें तो सिर्फ बीस जिलों में 9,011 लोग सड़क दुर्घटनाओं के शिकार हुए हैं। कानपुर टॉप पर है, जहां 618 लोग हादसे के शिकार हुए। दूसरे व तीसरे नंबर पर आगरा व प्रयागराज हैं, जहां 560 एवं 550 मौतें हुई हैं। बुलंदशहर में 525, अलीगढ़ में 513, मथुरा में 512, लखनऊ में 482, उन्नाव में 480, हरदोई में 461, बरेली में 440, सीतापुर में 416, फतेहपुर में 412, गोरखपुर में 410, गौतमबुद्धनगर में 406, जौनपुर में 379, मेरठ में 374, बाराबंकी में 374, शाहजहांपुर में 370, गाजियाबाद में 369 और कुशीनगर में 361 लोग हादसे के शिकार हुए। लखनऊ सातवें नंबर पर है।

पुष्पसेन सत्यार्थी, उत्तर प्रदेश में सड़क सुरक्षा के परिवहन आयुक्त पुष्पसेन सत्यार्थी ने बताया कि सर्वाधिक हादसे नेशनल हाईवे पर हो रही हैं। पिछले वर्ष 39.9 फीसद लोगों की दुर्घटना नेशनल हाईवे पर हुई है। जबकि स्टेट हाईवे पर दुर्घटनाओं का प्रतिशत 30.4 रहा है। इसके अतिरिक्त अन्य सड़कों पर 28.5 फीसदी हादसे हुए हैं। एक्सप्रेस वे पर हादसों का ग्राफ  कम रहा है। यह महज 1.2 प्रतिशत रहा है। उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं के पीछे जो मुख्य वजहें सामने आ रही हैं, उसमें ओवरस्पीडिंग से 38.4 प्रतिशत लोगों की मौत हुई है। गलत दिशा से चलने पर 11.9 फीसद, वाहन चलाते समय मोबाइल का इस्तेमाल करने पर 9.2 प्रतिशत, नशे में गाड़ी चलाने से 6.6 प्रतिशत, ट्रैफिक लाइट जम्पिंग में 1.7 प्रतिशत तथा अन्य कारणों से 32.3 प्रतिशत लोगों की जान गई।परिवहन विभाग लगातार हादसों को रोकने के लिए प्रयास कर रहा है। इसकेलिए जागरुकता अभियान चलाए जा रहे हैं। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों पर शिकंजा भी कसा जा रहा है। दुर्घटनाओं में मौत के आंकड़े चिंताजनक हैं, जिन जिलों में ज्यादा मौतें हो रही हैं अब परिवहन विभाग उन्हीं जिलों पर सबसे ज्यादा फोकस करेगा।

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