मायावती का मूस्लिम दांव! इमरान मसूद सपा छोड़ बाजपा का हाथ थामा, मायावती ने बनाया पार्टी का पश्चिमी उप्र संयोजक


मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ। 


पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मुस्लिम राजनीति के दल बदल को लेकर चर्चित चेहरे पूर्व विधायक इमरान मसूद बुधवार को लखनऊ में सपा छोड़कर हाथी पर सवार हो गए। बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी ट्वीट के जरिए यह जानकारी दी और साथ ही उन्हें पश्चिमी उप्र का संयोजक बनाने की भी घोषणा की। निकाय चुनाव की तैयारी में सभी दल लगे हैं। ऐसे में इमरान मसूद ने पाला बदल कर सपा को तगड़ा झटका दिया है। विधानसभा चुनाव से पहले जनवरी माह में इमरान ने कांग्रेस छोड़कर सपा का दामन थामा था। वह नकुड़ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने उन्हें टिकट नहीं दिया जिससे वह नाराज चल रहे थे। बुधवार को वह लखनऊ पहुंचे और बसपा सुप्रीमो मायावती से मिलकर बसपा ज्वाइन कर ली। गौरतलब है कि इमरान मसूद साल 2007 में मुजफ्फराबाद सीट से निर्दलीय विधायक रह चुके हैं। उसके बाद वह लगातार तीन चुनाव हार गए। नकुड़ से दो विधानसभा चुनाव और सहारनपुर से लोकसभा चुनाव लड़े लेकिन तीनों में हार का सामना करना पड़ा। वह उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं।


बसपा ज्वाइन करने के बाद इमरान ने कहा कि बसपा ही भाजपा को हराने में सक्षम है। विधानसभा चुनाव के दौरान वह कांग्रेस छोड़कर सपा में इसलिए आए थे कि भाजपा को हराने का प्रयोग किया जाएगा, लेकिन यह प्रयोग सफल नहीं हो सका। हमारे समाज ने एक तरफा वोट सपा को दिया लेकिन सपा सफल नहीं हो सकी। ऐसे में अब बसपा के साथ मिलकर नए समीकरण बनाए जाएंगे। बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि पश्चिमी उप्र की राजनीति में इमरान जाना पहचाना नाम हैं। उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ बसपा ज्वाइन की और पूरी दमदारी के साथ काम करने का वादा किया। उनका तहेदिल से स्वागत है। इनके जोश व उत्साह को देखकर ही उन्हें पश्चिमी उप्र का पार्टी संयोजक बनाया जाता है। उन्हें अकलीयत समाज को जोड़ने की भी विशेष जिम्मेदारी दी गई है। आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव के बाद अब स्थानीय निकाय चुनाव से पहले मसूद का बसपा में शामिल होना यूपी की राजनीति में शुभ संकेत है। मुस्लिम समाज को भी यकीन है कि भाजपा की द्वेषपूर्ण व क्रृर राजनीति से मुक्ति के लिए सपा नहीं, बसपा ही जरूरी है। सर्वसमाज का हित, रोजी रोजगार, सुरक्षा व धार्मिक स्वतंत्रता आदि बीएसपी में ही संभव है। जिस पर विश्वास समय की मांग है।

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