कोई है? जो वित्त विहीन शिक्षको की सुधि ले !!

 


वित्त विहीन शिक्षकों को सरकार के मदद की जरूरत
प्रतीकात्मक फोटो
बस्ती/ जौनपुर
दो बार कोरोना संकट के समयँ सरकार अपनी विफलताओं को मानने के लिए तैयार नहीं है वहीं सरकारी मदद बांटने में भी सरकार भेदभाव कर रही है। प्रधानमंत्री के मूल मंत्र आपदा में अवसर तलाशते हुए प्रदेश सरकार द्वारा इस भीषण महामारी के बीच भी अपना वोट बैंक बढ़ाने की गरज से ही आर्थिक इमदाद दी जा रही है। उक्त बातें कहते हुए उ0प्र माध्यमिक शिक्ष्क संघ के कार्यकारी अध्यक्ष रमेश सिंह ने सरकार पर वित्त विहीन शिक्षकों  के साथ सौतेला व्यवहार करने का लगाया है।
 उन्होने कहा  है कि प्रदेश सरकार द्वारा कोरोना संक्रमण के दौरान समाज के सभी वर्गों जैसे-व्यापारी, किसान,मजदूर,पटरी पर ठेला लगाने वाले,सहित कमजोर तबके के लोगों को कुछ न कुछ आर्थिक मदद उपलब्ध कराया है जो प्रशंसनीय है लेकिन  इस महामारी के बीच सरकार का शिक्षक, कर्मचारी विरोधी चेहरा भी उजागर हुआ है क्योंकि सरकार द्वारा प्रदेश के लाखों वित्त विहीन शिक्षक साथियों को न तो पहली लहर में ही और न दूसरी लहर में  कोई आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गयी है जिसके कारण पहले से ही भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके वित्तविहीन शिक्षक   के परिजन अब फांकाकशी को मजबूर हैं। लगातार विद्यालय बंद चलने के कारण न तो बच्चे विद्यालय आ रहे हैं और न ही उनके परिजन शुल्क ही जमा कर पा रहें हैं जिससे विद्यालय प्रबन्धन द्वारा अपने शिक्षकों को मानदेय देने में असमर्थता व्यक्त की जा रही है। रमेश सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर यह मांग किया है कि सरकार द्वारा इन लाखों वित्त विहीन शिक्षको को अविलंब कुछ न कुछ आर्थिक सहायता अवश्य उपलब्ध कराई जाय जिससे कि उनके घरों के चूल्हे जलते रहें।
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