कोर्ट भी अपनी हदें समझे!भारत मे लोक तंत्र है,तन्त्रलोक नही, कोर्ट भी समझे,

 *अचानक देश के हाइकोर्टो की  केंद्र सरकार के प्रति आक्रोश दीखता है और  इसमें दिल्ली हाइकोर्ट तो बहुत ही सक्रिय है। केजरीवाल सरकार से तो कुछ भी पूछने की जरूरत ही नही समझते।दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट केंद्र पर दिल्ली को ऑक्सीजन देने के लिए तो दबाब तो बनाती हैं मगर केजरीवाल सरकार से एक बार नहीं पूछती कि आज तक मिली जितनी भी ऑक्सीजन उसका वितरण कैसे किया। केजरीवाल सरकार के मंत्री इमरान हुसैन के घर से 600 से ज्यादा ऑक्सीजन सिलेंडर 587 ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर जब्त किये गए और इसी तरह नवनीत कालरा के यंहा भी (खान चाचा रेस्टोरेंट के मालिक)के ठिकानों से सैकड़ों कॉन्सेंट्रेटर और ऑक्सीजन सिलेंडर बरामद होने के बाद भी गिरफ्तारी नही हो पा रही क्योंकि दोनों बडे रसुखदार है। कालरा के कांग्रेस के साथ केजरीवाल के सभी बड़े नेताओं के साथ बहुत निकट के संबंध है और तो और एक चर्चा जोरो पर है कि एक पूर्व CJI के परिवार साथ घरेलू संबंध है। इस तरह की ख़बरें मी-लार्ड तक जरूर जाती होगी लेकिन फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को धमकाते हुए कहा,हमें सख्ती करने पर मजबूर ना करो। मेरे जैसे सामान्य व्यक्ति दिनेश का तो आप सभी प्रबुद्व जनो के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध है कि देश के सभी अदालतो को ये आदेश देने का कष्ट करे कि नवनीत कालरा और इमरान हुसैन को कोई भी अदालत अग्रिम जमानत ना दे। हाई कोर्ट के जस्टिस विपिन सांघी और रेखा पल्ली के द्वारा हर सुनवाई पर नजर रखे क्योंकि जैसे ही इन दोनों जजो के सामने इमरान का मामला आया तो उन्होंने उसे कल शनिवार को कोर्ट में हाजिर हो कर अपना पक्ष रखने को कहा और  साथ ही याचिकाकर्ता पर ही सवाल खड़े कर दिए। हर प्रबुद्ध नागरिक ताज्जुब ही करेगा ये देख कर कि इमरान ने अपना पक्ष में अभी कुछ कहा भी नहीं मगर जस्टिस सांघी तो ऐसे बोल रहे थे जैसे वो इमरान हुसैन के वकील हों। जस्टिस सांघी के शब्द सुनिए*

*1) याचिकाकर्ता द्वारा दिए चित्रों से नहीं लगता कि वहां कोई जमाखोरी हो रही थी।*

*2) याचिकाकर्ता पर सवाल उठाते हुए कोर्ट ने कहा कि हो सकता है उन्हें ऑक्सीजन फरीदाबाद से मिली हो और स्वयं अपने सिलेंडर का प्रबंध किया हो।*

*3) अगर उन्होंने आबंटित ऑक्सीजन से प्राणवायु नहीं ली तो आपको कोई समस्या नहीं होनी चाहिए यानि इमरान हुसैन के बिना कुछ कहे जस्टिस सांघी ने उसका पक्ष रख दिया अगर मगर जोड़ कर जैसे वो खुद ही इमरान हुसैन के वकील हैं और सुनवाई को भी सोमवार के लिए सरका दी जिससे वो अपना बचाव के लिए पूरी तैयारी कर ले। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में ऑक्सीजन के ऑडिट करने के लिए कमिटी बनाई है लेकिन शायद वो आने वाले दिनों में मिलने वाली ऑक्सीजन का ऑडिट करेगी। केंद्र से आज तक मिली ऑक्सीजन (50000 टन) का ऑडिट करने की जरूरत क्यों नही समझती । इमरान और नवनीत कालरा जैसे कितने लोगों को कालाबाज़ारी करने के लिए केजरीवाल ने ऑक्सीजन दी या नही इसकी सीबीआई से जांच की मांग पूरे देश में उठाने की जरूरत है। अगर षड्यंत्र है तो षड्यंत्र का पर्दाफाश भी होना बहुत जरूरी है।  वरना आप सभी की सुप्तावस्था से अदालतें मोदी सरकार पर लट्ठ बजाती रहेगी।                                                                        भारत सरकार को इंदिरा से सिखना चाहिये कुछ विषयो पर तो। एक बार इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि इंदिरा गांधी भ्रष्टाचारी है इन्हें चुनाव लड़ने से रोका जाता है। इंदिरा गाँधी को जब ये बात पता चली तो तो उन्होंने कहा कि मीलॉर्ड की ऐसी की तैसी*

*अबे PM हम हैं देश के*

*इंदिरागाँधी की विचारधारा और उनकी पार्टी से मेरा कोई सरोकार नहीं है क्योंकि में एक सनातनी हूँ और हिन्दुसंस्कृति में आस्था रखने वाला हूँ लेकिन अपने दुश्मनों के लिए इंदिरा जी की नीति आज भी भारतीय राजनीति में धारण करने योग्य है। विदर्मियो और जयचन्दों के लिए मुंह में दही जमाकर बैठने से कुछ नहीं होगा। जो लोकतंत्र पर हमला करे संविधान पर अंगुली उठाये और भारत माँ के खिलाफ बिना तथ्यों के बोले, बदतमीजी करे या  प्रोपेगेंडा फैलाये, उन सभी लोगो को तो कुत्ते की तरह दौडा- दौड़ा कर पीटना चाहिए मारिये , पूरा भारत आपके साथ है और  अदालतो को भी समझ लेना चाहिए कि भारत मे लोकतंत्र है, तंत्रलोक नही,जनता मालिक होती है इसलिए न्यायमूर्तियों का कर्त्तव्य बनता है कि अदालतो के प्रति जनता में इज्जत बनी रहे। निष्पक्षता से रहना चाहिए*

दिनेश

Comments