याद किये गए जेपी बाबू

 


 बस्ती


 समाजवादी पार्टी कार्यालय रविवार को प्रखर समाजवादी स्वर्गीय जय प्रकाश नारायण को उनकी 118 वीं जयन्ती पर याद किया गया। पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर माल्यार्पण करते हुये कहा कि जेपी बाबू के नाम से लोकप्रिय जयप्रकाश ने देश को अन्धकार से प्रकाश की ओर लाने का सच्चा प्रयास किया, जिसमें वह पूरी तरह से सफल रहे हैं। लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने भारतीय जनमानस पर अपना अमिट छाप छोड़ी है। जयप्रकाश जी का समाजवाद का नारा आज भी गूँज रहा है। समाजवाद का सम्बन्ध न केवल उनके राजनीतिक जीवन से था, अपितु यह उनके सम्पूर्ण जीवन में समाया हुआ था।


जिलाध्यक्ष महेन्द्रनाथ यादव ने कहा कि देश  को आजाद कराने हेतु जय प्रकाश जी ने तरह-तरह की परेशानियों को झेला किन्तु इन्होंने अंग्रेजों के सामने घुटने नहीं टेके। क्योंकि ये दृढ़निश्चयी व्यक्ति थे। संघर्ष के इसी दौर में उनकी पत्नी भी गिरफ्तार कर ली गईं और उन्हें दो वर्ष की सजा हुई। क्योंकि वह भी स्वतंत्रता आंदोलन में कूदी थीं और जनप्रिय नेता बन चुकी थीं। जयप्रकाश जी अपनी निष्ठा और चतुराई के लिए प्रसिद्ध थे। वे सच्चे देशभक्त एवं ईमानदार नेता थे। वे ब्रिटिश प्रशासन का समूल नष्ट करने पर तुले हुए थे।


पूर्व विधायक राजमणि पाण्डेय ने जे.पी. बाबू को नमन् करते हुये कहा कि महज 18 साल की उम्र में 1920 में जेपी का विवाह ब्रज किशोर प्रसाद की बेटी प्रभावती से हुआ। कुछ साल बाद ही प्रभावती ने ब्रह्मचर्य का व्रत ले लिया और अहमदाबाद में गांधी आश्रम में राष्ट्रपिता की पत्नी कस्तूरबा के साथ रहने लगीं। जेपी ने भी पत्नी के साथ ब्रह्मचर्य व्रत का पालन किया। जयप्रकाश नारायण प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की प्रशासनिक नीतियों के खिलाफ थे। 1974 में पटना में छात्रों ने आंदोलन छेड़ा था। आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से अंजाम देने की शर्त पर उन्होंने इसकी अगुआई की। इसी दौरान देश में सरकार विरोधी माहौल बना तो इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा कर दी थी। जेपी भी जेल गए और करीब सात महीनों तक सलाखों के पीछे रहे। उनकी तबीयत भी उन दिनों खराब थी, लेकिन जो सम्पूर्ण  क्रांति का नारा दिया, उसने देश में लोकतंत्र की बहाली दोबारा सुनिश्चित कर दी।


पूर्व विधायक रामललित चौधरी, राजेन्द्र चौधरी, सिद्धेश सिन्हा, यज्ञेश पाण्डेय, आदि ने जेपी बाबू के योगदान पर प्रकाश डालते हुये कहा कि जेपी आंदोलन में कई छात्र नेता में शामिल हुए कई नेता जैसे लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह यादव, नीतीश कुमार, राम विलास पासवान, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद सुशील मोदी जैसे दर्जनों नेता बाद में वर्षों तक सत्ता में रहे। उन्होने राजनीति की एक समर्थ पीढी देश को दिया। उनका योगदान सदैव याद किया जायेगा।


जेपी बाबू को नमन् करने वालों में मुख्य रूप से महेश तिवारी, राम उजागिर गौतम, रमेश चन्द्र, जगराम चौधरी, अरविन्द सोनकर, अखिलेश यादव, अभिषेक उपाध्याय, मो. जावेद, हृदयराम यादव, वृजेश मिश्र, रन बहादुर यादव, तूफानी यादव, जोखूलाल यादव, आर.डी. निषाद, ज्ञान चन्द्र चौधरी, शिबलू पाण्डेय, रघुनन्दन साहू, सुमन सिंह, इन्द्रसेन यादव, अमित यादव, अमित यादव, प्रशान्त यादव, मो. सलीम, रवि गुप्ता, अनिल निषाद, मो. आमिश, गौरीशंकर यादव, छोटू मिश्र, पिन्टू शुक्ल, रामवृक्ष यादव आदि शामिल रहे।


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