हकीकत से भागती यू पी सरकार फिल्मसिटी में डूबी ! राम गोबिंद चौधरी

हकीकत से भागने में यूपी सरकार फिल्मसिटी के सपने में डूब गयी है- रामगोविंद चौधरी


 


मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ।


"बहुत आगे बढ़े हैं काफिले वाले हकीकत है, मगर मंजिल की जो दूरी थी पहले सो अब भी है"। वर्तमान परिपेक्ष्य में यह पंक्तियां उत्तर प्रदेश सरकार पर सटीक बैठती है।समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने दोका सामना से विशेष बात-चीत में कहा कि मुुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हकीकत से भागने के लिये फिल्मसिटी के सपने में डूबने की ऐसी एक्टिंग कर रहे हैं। जिसमें कुछ भोजपुरी एक्टरों के साथ मुट्ठीभर रिटायर लोग डूब गये हैं।


मंगलवार को जब मुख्यमंत्री अपने सरकारी आवास पर जुबानी फिल्मसिटी बना रहे थे तब उनके आवास से थोड़ी दूर पर राजधानी में ही हकीकत तांडव कर रहा था। एक पटरी दुकानदार अर्थिकतंगी के चलते आत्महत्या कर लिया था। बुधवार को पटरी दुकानदारों ने जुलूस निकाल कर नगर आयुक्त को सौंपा। दुकानदारों का कहना है कि पिछले पांच महीनों से वह दुकान नहीं लगा पा रहे हैं। पुलिस, नगरनिगम और दबंगों के गठजोड़ ने उनका और उनके परिजनों का निवाला छीन लिया है। उससे भी ज्यादा क्रूर तांडव राजधानी के निजी कोविड अस्पतालों में हो रहा था। राजधानी के 4 निजी कोविड अस्पतालों में 48 लोगों ने दम तोड़ दिया।


यह वे लोग थे जो किसी भी तरह जान बचाने के लिये भारी कीमत देकर अच्छी सेवा लेने गये थे। जिलाधिकारी लखनऊ ने इन सभी चारो अस्पतालों से कारण पूछा है। प्रदेश में आपराधिक घटनाओं से लोग त्रस्त हैं। चार दिन पहले समाजवादी पार्टी की व्यापार सभा के प्रदेश अध्यक्ष संजय गर्ग ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था कि मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, नोयडा, मेरठ आदि स्थानों में व्यापारियों की हत्याओं के बाद दहशत व्याप्त है। व्यापारी मुजफ्फरनगर में पलायन को मजबूर हो गये हैं। कोरोना काल मे उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था का बुरा हाल रहा। दर्जनों जिलों में संवेदनहीन घटनायें हुई। राजधानी के कोविड अस्पताल घोषित किये गये लोकवन्धु अस्पताल में ऑक्सीजन जी आपूर्ति एकाएक रुक गयी थी।


उस समय 12 मरीज आईसीयू में भर्ती थे। जान जाता देख भर्ती मरीजों ने अपने घर-परिवार व प्रशासनिक अधिकारियों की मोबाइल की घंटियां बजाये, तब सीएमएस डॉ अमिता ने मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर लगा कर जान बचा पायी। बाद में पाइप लाइन की ऑक्सीजन सप्लाई ठीक हुई तब अस्पताल की व्यवस्था ठीक हुई।लेकिन मरीजों की जान भगवान भरोसे ही बची। किसानों और कारोबारियों द्वारा अर्थिकतंगी में उन्नाव, कानपुर, चित्रकूट, हरदोई में आत्महत्याओं ने व्यस्था को हिला दिया है। सरकार उधर से मुंह फेर कर फिल्मसिटी में डूबी है।कोविड के नाम पर अस्पतालों की ओपीडी बंद कर दी गयी। न जाने कितने लोग बिना कोविड के जान गंवा बैठे।


मुख्यमंत्री के शहर गोरखपुर में लगातार गोलियों की तड़तड़ाहट की घटनायें हो रही है। शेष प्रदेश का क्या हाल होगा? समाजवादी पार्टी की सरकार में बनी बिल्डिंगों मुख्यमंत्री कार्यालय लोकभवन, पुलिस मुख्यालय सिग्नेचर बिल्डिंग, इंटरनेशनल स्टेडियम, लखनऊ मेट्रो का उद्घाटन करके अपनी पीठ थपथपा रही है। जो लोग साढ़े तीन वर्ष में एक ईंट नहींं रख पाये वह शेष बचे सवा साल के कार्यकाल में संसार का सबसे बड़ा फिल्मसिटी देंगे। 


 


 


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