पर्यावरण के बीना मानव जीवन की कल्पना तक नही

कौटिल्य वार्ता
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पर्यावरण के बिना मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। सच तो ये है कि हमारा सारा जीवन ही प्रकृत्ति पर निर्भर एवं आश्रित है। हमारा खाना, हमारा पीना, हमारा पहनना और यहाँ तक कि हमारी प्रत्येक स्वास भी प्रकृत्ति के ही अधीन है।


 


कुछ काम हम घर बैठे भी बड़ी आसानी से पर्यावरण रक्षा के लिए कर सकते हैं। जीवन में शाकाहार अपनाना, जल की बूँद-बूँद का संचय करना, केवल जरूरत पड़ने पर विद्युत उपकरणों का प्रयोग करना, अन्न का दुरुपयोग करने से बचना व साथ ही साथ पोलीथीन व प्लास्टिक से निर्मित सामग्रियों का कम से कम उपयोग करना जैसे अनेक छोटे - छोटे कार्य पर्यावरण संरक्षण, संवर्द्धन व सुरक्षा की दिशा में एक सार्थक प्रयास और पहल होगी।


 


प्रकृत्ति ने सब कुछ दिया है तो हमारा भी उत्तरदायित्व बनता है कि हमें भी प्रत्येक वर्ष कम से एक वृक्ष लगाकर माँ समान अपनी इस प्रकृत्ति के श्रृंगार के लिए संकल्पित होना होगा।


 


यह प्रकृत्ति मनुष्यों की सभी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन प्रदान करती है लेकिन लालच पूरा करने के लिए नहीं। अति लालच और व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए प्रकृत्ति के साथ छेड़छाड़ करना प्रकृत्ति के महा कोप का निमित्त बनना भी है।


 


अपनी भावी पीढ़ियों को उबारने का संकल्प लेते हैं। आओ मिलकर इस धरा को संवारने का संकल्प लेते हैं।।


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