उच्चस्तरीय जांच हो सकती है, गायघाट किताबुल्ला प्रकरण में

 बस्ती

किताबुलाह के कर्मो की हो सकती है उच्चस्तरीय जांच.जिस प्रकार कानून और शासन,प्रशासन को धोखा देकर किताबुल्ला ने मदरसे पर एकाधिकार कर लिया वह उसकी शातिराना हरकतों का ही अंजाम है, एटीएस व  मुख्य मंत्री को भेजे पत्र में  वादी मेहदी हसन ने लिखा है,समाजवादी पार्टी,बसपा की तत्कालीन सरकार की आड़ में किताबुला ने राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में भी जमकर हिस्सा लिया,घर के तह खाने से निकले हथियारों के जखीरे चिल्ला कर गवाही दे रहे हे.

मेहदी हसन का आरोप है थाना पुलिस को भी उसकी गति विधियों की भनक तक नहीं लागपाती.तत्कालीन जिलाधिकारी राज शेखर ने भी मर्द में दो कथित नियुक्ति पर जिला विद्यालय निरीक्षक,बस्ती,वित्त एवम लेखाधिकारी एवम जिला अल्पंख्यक कल्याण अधिकारी को जांच हेतु निर्देशित किया था,पर उसकी लीपापोती का भी आरोप मेहदी हसन ने लगाया है .

बताते हैं अपनी रसूख के लिए किसी भी सीमा तक जाने की जिद वाला किताबुल्ल अपनी दो कथित बहुओ की विवादित कमेटी रहते नियुक्ति की ओर बाद में अपने ही बाटो से निकाह.इसका अर्थ था शादी के पहले नियुक्ति और नियुक्ति के बाद शादी.अर्थात चट्ट मगनी पट्ट बियाह.की कहावत को भी चरितार्थ किया.

मेहदी हसन का कहना है रसूख और पैसे के बल पर अपनी कथित कामयाबी का परचम लहराया करता रहा,बताते हैं. बताते है तत्कालीन सत्ता प्रतिष्ठान के बूते ही किताबुल्ला सहित असंख्य लोगो का आयुधाश्त्र भी मिलता रहा.2012में उसके घर से बरामदगी का दंश आज भी

वह दिख रहा है.मेहदी हसन का कहना है योगी राज में न्याय मिलने की उम्मीद है.बताते है अभी बस्ती पुलिस कथित फर्जी  एफ आई आर की जॉच होरही है .विश्वास है न्याय मिलेगा.

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