आपातकाल:इंदिरा की काली करतूत का साक्षी ! इंडियन एक्सप्रेस अख़बार का उसदिनका पेज

 बस्ती,25 जून उत्तरप्रदेश


आज के ही दिन आधीरात को तत्कालीन प्रधान मंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने विना राष्ट्रपति  की मंजूरी के आपात काल लगा दिया था,संविधान में प्रदत्त सभी मूल अधिकार जैसे,प्रेस की आजादी,अभिव्यक्ति की आजादी अखबारों पर सेंसरशिप सहित अनेक प्रतिबन्धों के साथ लाखो नेताओ और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल केनबी हवाले करदिया गया था।-----आज उसी तानाशाह की सन्तति मोदी और भाजपा को लोक तंत्र की सीख देरही, इतना ही नहीं जिनको जेलों में ठूसा वही नीतीश,लालू उसके साथ आलू बनने को सनद्ध है, हमारे जैसे असंख्य जनों पर खजाना लूटने का fir दर्ज हुआ।


अनेक अखबार चारण भक्ति और अनेक देशभक्ति में लगगये थे।वाराणसी से प्रकाशित गांडीव,आज इंडियन एकडप्रेस,तरुण भारत, स्वदेश आदि ने तानाशाही का प्रतिवाद स्वरूल अपने सम्पादकीय ओर अग्रलेख के पन्नो को खाली छोड़ कर् प्रतिवाद किया था।

आज काले कानून के काले अध्याय लागू करने वाली कांग्रेस और राहुल के बराती होंने का स्वंपनदेखने वालों की में निंदा करता हूं।स्वनाम धन्य राम नाथ गोयनका का एक्सप्रेस टावर भी इंदिरा के अभिमान ने ध्वस्त कर दिया।

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