निपुण भारत मिशन संगोष्ठी. देश व् समाज के विकास नैतिक मूल्यों व् गुरुकुल परम्परा का अमूल्य योगदान! डॉ आशीष

कौटिल्य वार्ता
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 निपुण भारत के मण्डलीय कार्यशाला में शिक्षा को बेहतर बनाने पर व्यापक विमर्श

बस्ती । 


बुधवार को डायट सभागार में निपुण भारत मिशन के अर्न्तगत एक दिवसीय मण्डलीय गोष्ठी और चिन्तन कार्यशाला का आयोजन ए.आर.पी. एवं एस.आर.   जी. के संयोजन में किया गया। मुख्य अतिथि डायट प्राचार्य जितेन्द्र कुमार गौड़ ने कहा कि नये सन्दर्भो में शिक्षकों को अपने दायित्वों का निष्ठा से निर्वहन करना होगा। कहा कि शिक्षा क्षेत्र में जो नित नूतन प्रयोग हो रहे हैं उसमें एआरपी और एसआरजी की भूमिका महत्वपूर्ण है। शिक्षक और छात्रों के बीच संवाद की प्रक्रिया प्रभावशाली हो इस दिशा में शिक्षकों को प्रेरित किया जाय। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के आधार पर ही परिषदीय विद्यालय अभिभावकों का विश्वास जीत पायेंगे।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. इन्द्रजीत प्रजापति ने विद्यालय कैसे निपुण बनाया जाए, अध्यापकों को कैसे मजबूत किया जाए, कार्यों के सम्पादन,, शिक्षण सामग्री का किस प्रकार कक्षा कक्ष में प्रयोग किया जाए, शिक्षण योजना बनाकर कक्षा कक्ष को रोचक बना कर  बच्चों को उन्हीं के अनुरूप शिक्षा प्रदान कर निपुण बनाया जाने के व्यवहारिक प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी।

मण्डलीय गोष्ठी और चिन्तन कार्यशाला में मुख्य वक्ता आशीष ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था के इतिहास, बदलते स्वरूप, तकनीकों के प्रयोग आदि पर चर्चा किया। कहा कि गुरूकुल परम्परा से अब तक समय के साथ कई सन्दर्भ बदलें। ए.आर.पी एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सर्वेश शुक्ला ने कहा कि  निपुण भारत मिशन को सफल बनाने के लिए प्रदेश कैसे निपुण बने, जिला व मंडल फिर प्रदेश को निपुण बनाने की दिशा में काम कैसे किया जाए उस पर प्रकाश डाला। कहा कि बेसिक स्कूली शिक्षा महानिदेशक विजय किरण आनन्द की अगुआई में निपुण प्रदेश बनाने के लिए जो पहल की गई है उसे मिलकर साकार करना होगा। कार्यशाला में अम्बिका पाण्डेय, जिलाध्यक्ष हरिमोहन सिंह, सूर्य प्रकाश शुक्ल, अविनाश उपाध्याय, रामसेवक गुप्ता, विजय कुमार पाण्डेय, मनोज कुमार पाण्डेय, जितेन्द्र कुमार, बालमुकुन्द मौर्या, डा. हरि प्रकाश पाठक, वीरेन्द्र कुमार पाण्डेय, संजय सिंह, अविनाश दूबे, सन्तोष कुमार पाण्डेय, रामकंवल, विनोदचन्द, कल्पना, मुस्तन शेरूलाह, विनयकान्त मिश्र, एसआरजी मण्डल में अंगद प्रसाद पाण्डेय, डा. सर्वेष्ट मिश्र, आशीष श्रीवास्तव, राकेश पाण्डेय, प्रदीप जायसवाल, गिरजेश सिंह, रमेश चौधरी, अनिल पाण्डेय, सुनील बौद्ध आदि एआरपी गणों ने       सम्बोधित कर अपने अनुभवों को साझा किया। कार्यशाला में समस्याओं, चुनौतियों और उसके निस्तारण, निपुण विद्यालयों की सार्थकता पर व्यापक विमर्श हुआ। डायट प्रवक्ता इमरान खान, कल्याण पाण्डेय, डा. रविन्द्रनाथ त्रिपाठी, शशिदर्शन त्रिपाठी, मृत्युंजय सिंह, कुलदीप चौधरी आदि ने निपुण भारत की प्रक्रिया, उसके व्यवहारिक प्रयोगों की जानकारी दी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बस्ती मण्डल के एआरपी, एसआरजी उपस्थित रहे। अंत में जिलाध्यक्ष सूर्य प्रकाश शुक्ल ने उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुये कहा कि यह कार्यशाला अपने लक्ष्य में सफल रही।

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