आर टी ओ दफ्तर पर दलालो का कब्जा,

 



बस्ती, 03 जून। 
आरटीओ दफ्तर में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने पहुंचे व्यक्ति की पटल सहायक और उसके गुर्गो द्वारा मारने पीटने के मामले में कार्यवाही सिफर रही। महकमे के अफसरों और पटल सहायकों की मनमानी मुख्यमंत्री के आदेश पर भी भारी पड़ रही है। सीएम ने साफ कहा है कि आरटीओ दफ्तरों को बाहरी कर्मचारियों और दलालों से मुक्त कराया जाये।

बस्ती में ये आदेश हाशिये पर है। यह बाते राष्ट्रीय मानवाधिकार सेवा ट्रस्ट के प्रदेश मीडिया प्रभारी महेन्द्र श्रीवास्तव ने मीडिया को जारी बयान में कही। उन्होने कहा संदर्भित मामले में एफआईआर, डीएम द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच कमेटी के नतीजे शून्य है। दबंग और रसूखदार पटल सहायक और गुर्गे फिर उसी जगह तैनात होकर मनमानियों को अंजाम दे चुके हैं, दूसरी ओर डीएम के आदेश का बेअसर होना प्रशासन के प्रति जनता का भरोसा कम कर रहा है। आरआई संजय कुमार दास की नाक के नीचे मनमानियां हो रही हैं।

लेकिन वे व्यवस्थायें बदलने को या तो तैयार नही हैं या फिर मातहत उनकी बात ही नही मानते। राष्ट्रीय मानवाधिकार सेवा ट्रस्ट के मीडिया प्रभारी ने डीएम से अपील किया है कि आरटीओ आफिस में पूर्व में हुई मारपीट मामले में हुई जांच का एक बार अवलोकन कर लें। दोषियों के खिलाफ कार्यवाही न हुई तो जांच से लोगों का भरोसा उठ जायेगा। उन्होने यह भी कहा कि आरटीओ दफ्तर के विस्तार पटल (र्ंआईटीआई परिसर) में सहायकों की भारी कमी है। छबिलहा कार्यालय से कुछ लोगों को यहां सम्बद्ध कर दिया जाये जिससे कामकाज आसानी से होता रहे। यहां कम से कम एक महिला पटल सहायक की तैनाती भी जरूरी है। एआरटीओ प्रशासन अरूण प्रकाश चौके द्वारा कई आदेशित किये जाने के बाद भी स्थितियां जस की तस हैं।

Post a Comment

Previous Post Next Post

Contact Form