दूसरों का पेट भरने वालों को खुद ही खाने के लाले पड़े !

 




जौनपुर। 

वैश्विक महामारी कोरोना से हर कोई परेशान है। किसी की जिदगी पर संकट है तो किसी का रोजगार छिन गया है। जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों के आस पास वे सामने होटल व खाद्य सामग्री की दुकानें बंद होने से बाहर से आने वालों को भोजन के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। वहीं ठेला व अन्य छोटे दुकानदारों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है। 
अस्पतालों में भर्ती मरीजों को सरकारी स्तर से खाना-नाश्ता तो मिल जा रहा है, लेकिन उनके परिजनों को भोजन के संकट से रूबरू होना पड़ रहा है। 
अस्पतालों में दूर दराज से मरीज इलाज कराने आते हैं। प्रसव से लेकर हर प्रकार के ऑपरेशन के लिए मरीज यहां भर्ती कराते हैं। कोरोना संक्रमितों व परिजनों को अस्पताल के सामने पहले भोजन उपलब्ध होता रहा लेकिन अब अस्पताल मरीज लेकर आने वालों को भोजन के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। वहीं सैकड़ों ठेला एवं फुटपाथी दुकानदार बेरोजगार हो गए हैं। 
उनके समझ में नहीं आ रहा है कि वे अपने परिवार का खर्च किस प्रकार चलायें। अस्पताल के पास पूड़ी सब्जी बेचने वाले महेश ने कहा कि पहले दिन भी ठेला लगाने पर दो तीन सौ रूपये बच जाते थे और रोज घर का खर्चा किसी प्रकार से चल जाता था लेकिन 20 दिनों से बन्दी के कारण खाने की व्यवस्था नहीे हो पा रही है। छोटे धन्धा कर रोज कमाने खाने वालों केलिए बन्दी काल साबित हो रही है। उनकी मदद को न प्रशासन सामने आ रहा है न स्वसेवी संस्थाये और जनप्रतिनिधि।
Comments