के एन गोविंदाचार्य का पत्र किसान आंदोलन के संदर्भ में

 28 जनवरी 20


26 जनवरी को किसान संगठनों द्वारा आयोजित किसान ट्रैक्टर्स परेड में कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं भी हुई हैं। मैं उनकी निंदा करता हूँ।


 लालकिले पर जहां प्रधानमंत्री 15 अगस्त को तिरंगा लहराते हैं, उस पोल पर चढ़ कर एक व्यक्ति ने गुरुद्वारे पर लगने वाले केसरिया झंडे को फहराया, वह अधिक दुर्भाग्यपूर्ण है। दिल्ली की सीमा पर हजारों किसान ट्रैक्टर्स परेड के लिए पहुंच रहें हैं, इस सूचना के बावजूद पुलिस प्रशासन का विफल हो जाना चिंताजनक है। किसान नेताओं ने ट्रैक्टर्स परेड को शांतिपूर्ण और अनुशासित बनाये रखने की पूरी सावधानी नहीं रखी, यह बात चिंतनीय है।


मेरा किसान संगठनों के नेताओं से अपील है कि 26 जनवरी 2021 को हुयी चूक की जांच के लिए एक समिति का गठन करें। वह समिति पूरी निष्पक्षता के साथ हुयी घटनाओं की नीरक्षीर विवेक को अपनाकर जांच करे, और सत्य को देश और दुनिया के सामने लाये। अगर जांच में किसान संगठनों की गलती सामने आती है, तो उन्हें सार्वजनिक माफी मांगने से नहीं कतराना चाहिए।


किसान आंदोलन की अब दो प्रमुख मांगे हैं। 1) केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (#MSP) गारण्टी का कानून बनाये और 2) नए तीन कृषि कानूनों को केंद्र सरकार वापस ले। इस पर मैंने आग्रह किया था कि किसानों का विश्वास जीतने के लिए केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य गारण्टी कानून बनाने की घोषणा कर दे। उसके बाद तीन कृषि कानूनों पर पुनर्विचार के लिए एक समिति बनाने की घोषणा करे और उस समिति की रिपोर्ट आने तक उन कानूनों को स्थगित करने की घोषणा करे। 


मैं फिर सरकार से आग्रह करता हूँ कि वह देश की संवेदनशील परिस्थितियों को देखते हुए मेरे सुझावों पर उदारतापूर्वक विचार करे।

 लालकिले पर जहां प्रधानमंत्री 15 अगस्त को तिरंगा लहराते हैं, उस पोल पर चढ़ कर एक व्यक्ति ने गुरुद्वारे पर लगने वाले केसरिया झंडे को फहराया, वह अधिक दुर्भाग्यपूर्ण है। दिल्ली की सीमा पर हजारों किसान ट्रैक्टर्स परेड के लिए पहुंच रहें हैं, इस सूचना के बावजूद पुलिस प्रशासन का विफल हो जाना चिंताजनक है। किसान नेताओं ने ट्रैक्टर्स परेड को शांतिपूर्ण और अनुशासित बनाये रखने की पूरी सावधानी नहीं रखी, यह बात चिंतनीय है।



मेरा किसान संगठनों के नेताओं से अपील है कि 26 जनवरी 2021 को हुयी चूक की जांच के लिए एक समिति का गठन करें। वह समिति पूरी निष्पक्षता के साथ हुयी घटनाओं की नीरक्षीर विवेक को अपनाकर जांच करे, और सत्य को देश और दुनिया के सामने लाये। अगर जांच में किसान संगठनों की गलती सामने आती है, तो उन्हें सार्वजनिक माफी मांगने से नहीं कतराना चाहिए।


किसान आंदोलन की अब दो प्रमुख मांगे हैं। 1) केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (#MSP) गारण्टी का कानून बनाये और 2) नए तीन कृषि कानूनों को केंद्र सरकार वापस ले। इस पर मैंने आग्रह किया था कि किसानों का विश्वास जीतने के लिए केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य गारण्टी कानून बनाने की घोषणा कर दे। उसके बाद तीन कृषि कानूनों पर पुनर्विचार के लिए एक समिति बनाने की घोषणा करे और उस समिति की रिपोर्ट आने तक उन कानूनों को स्थगित करने की घोषणा करे। 


मैं फिर सरकार से आग्रह करता हूँ कि वह देश की संवेदनशील परिस्थितियों को देखते हुए मेरे सुझावों पर उदारतापूर्वक विचार करे।

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