इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि पुलिस भर्ती में लंबाई को लेकर संदेह दूर करने के लिए दोबारा जांच कराने का आदेश देना सही !

 प्रयागराज,उत्तरप्रदेश,12 दिसम्बर 20

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि पुलिस भर्ती में लंबाई को लेकर संदेह दूर करने के लिए दोबारा जांच कराने का आदेश देना गलत नहीं है। अभ्यर्थी के मन में माप को लेकर संदेह है तो दूर किया जाना चाहिए। किन्तु दोबारा जांच के लिए दूसरे जिले में मेडिकल बोर्ड गठित करना सही नहीं है। जहां पहली जांच हुई वहीं पर दोबारा जांच कराई जानी चाहिए।

कोर्ट ने बुलंदशहर के सीएमओ की अध्यक्षता में तीन डाक्टरों की टीम से जांच कराने के आदेश को संशोधित करते हुए कहा है कि यही बोर्ड बरेली के डाक्टरों व पुलिस के साथ गठित किया जाए। पहली जांच बरेली में हुई थी। इसलिए दोबारा वहीं के मेडिकल बोर्ड से जांच हो। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति गोविन्द माथुर तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ ने प्रदेश शासन की विशेष अपील को निस्तारित करते हुए दिया है।

अपील पर अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल व विपक्षी अभ्यर्थी योगेन्द्र कुमार के अधिवक्ता इरफान अहमद ने बहस की। मालूम हो कि याची योगेन्द्र कुमार ने 2018 की पुलिस भर्ती की परीक्षा में सफल होने के बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा दी। बरेली में हुई जांच में उनकी लंबाई 168 सेमी से कम पाई गई। इस पर याचिका दायर की और पुनः जांच कराने की मांग की। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने बुलंदशहर के सीएमओ व दो प्रोफेसर डाक्टरों की टीम गठित कर क्षेत्राधिकारी की मौजूदगी में जांच का आदेश दिया। मेडिकल बोर्ड ने जांच की और रिपोर्ट कोर्ट में पेश की। मेडिकल जांच रिपोर्ट में याची की लंबाई 168 सेमी से अधिक पाई गई तो कोर्ट ने याची को चयनित करने का निर्देश दिया जिसे अपील में राज्य सरकार ने चुनौती दी। अपर महाधिवक्ता का कहना था कि भर्ती नियमानुसार एक बार जांच की जा सकती है और जांच वहीं होगी जहां परीक्षा हुई हो। एकल पीठ ने दूसरे जिले की डाक्टरों की टीम से जांच का आदेश देकर क्षेत्राधिकार का अतिलंघन किया है। जो जिस तरीके से किया जाना है, वह उसी तरीके से किया जाना चाहिए।

खंडपीठ ने दोबारा जांच के आदेश पर सरकार की आपत्ति नहीं मानी किन्तु कहा कि जहां परीक्षा हुई हो, संदेह होने पर दोबारा जांच वहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने एकल पीठ के आदेश के अनुसार बरेली में डाक्टरों की टीम से जांच कराने का आदेश दिया है।

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