हुतात्मा स्वामी श्रद्धानन्द का बलिदान दिवस आर्य समाज नई बाजार बस्ती ने मनाएं

 बस्ती,23 दिसम्बर

आर्य समाज नई बाजार बस्ती के तत्वावधान में अमर हुतात्मा, दलितों के उद्धारक, राष्ट्रभक्त, स्वामी श्रद्धानंद जी का बलिदान दिवस मनाया गया। इस अवसर पर देवयज्ञ करके उपस्थित जनों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। यज्ञोंपरांत संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी की अध्यक्षता वैदिक विद्वान हरिपति पाण्डेय ने की। इस कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए आचार्य देवव्रत आर्य ने कहा कि मृतप्राय हिंदू जाति में नए रक्त का संचार करने वाले, अपनी सिंह गर्जना से देश और धर्म के दुश्मनों को कँपा देने वाले स्वामी दयानंद के अद्वितीय शिष्य स्वामी श्रद्धानंद जी का जीवन प्रत्येक बुद्धिजीवी व राष्ट्रभक्त के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मोहनदास करमचंद गांधी को प्रथम बार महात्मा कहने वाले स्वामी श्रद्धानंद जी ही थे। वेद मंत्र से प्रारंभ कर जामा मस्जिद से एक घंटे का व्याख्यान देने का ऐतिहासिक गौरव स्वामी श्रद्धानंद जी को प्राप्त है। महर्षि दयानंद के व्याख्यान से प्रभावित होकर नास्तिक तथा दुर्गुण, दुर्व्यसनों में लिप्त मुंशीराम अद्वितीय प्रतिभा के धनी राष्ट्रधर्म रक्षक स्वामी श्रद्धानंद बने। कार्यक्रम की अगली श्रृंखला में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय महासचिव डॉक्टर नवीन सिंह ने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति की रक्षा में स्वामी श्रद्धानंद जी ने पुनः गुरुकुलों की स्थापना करके एक नई दिशा दी तथा गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार की स्थापना करके विश्व विख्यात हुए। आर्य वीर दल बस्ती के जिला प्रभारी घनश्याम आर्य ने कहा कि स्वामी जी की हिंदू मुस्लिम एकता के मुरीद होकर अनेक मुस्लिम हिंदू धर्म में आने के लिए उत्सुक होने लगे इसी दौर में कराची से असगरी बेगम अपने भतीजे के साथ दिल्ली आई और स्वामी जी से मिलकर हिंदू धर्म में आने की इच्छा प्रकट की स्वामी जी ने उनकी इच्छा अनुसार उन्हें वैदिक धर्म में दीक्षित कर दिया। कुछ लोगों को यह पसंद नहीं आया। आज ही के दिन एक धर्मांध व्यक्ति अब्दुल रशीद के द्वारा धर्म परिवर्तन के बहाने स्वामी श्रद्धानंद जी को गोलियों से छलनी कर उनकी हत्या कर दी और स्वामी श्रद्धानंद बलिदान हो गए।


आर्य समाज नई बाजार बस्ती के पूर्व मंत्री  हरिराम आर्य जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि स्वामी श्रद्धानंद जी ने दलितोद्धार सभा की स्थापना की इस सभा के माध्यम से जाति पात के बंधनों से मुक्त कर हजारों दलितों को आर्य समाज में मिलाकर सम्मान दिया।

इस अवसर पर राधेश्याम आर्य और आयुषी आर्य ने स्वामी श्रद्धानंद पर गीत सुनाया तथा अपने सारगर्भित विचार दिए। कार्यक्रम के अंत में अपने अध्यक्षीय उदबोधन में हरिपति पाण्डेय ने  कहा कि स्वामी श्रद्धानंद जी ने अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया था उन्होंने जबरन छल कपट से धर्मान्तरित किये गए अपने हजारों हजार हिंदुओं को शुद्ध कर वापस अपने ही कुल में घर वापसी का एक ऐतिहासिक कार्य किया था। उन्होंने जातिवाद, छुआछूत, शिक्षा, वेद के पठन-पाठन, देश की एकता अखंडता, समाज सुधार व मानव कल्याण के लिए अपना घर परिवार धन-संपत्ति देश सेवा में अर्पित कर दिया। कार्यक्रम संयोजक आदित्य नारायण गिरी ने कहा कि स्वामी जी ने विद्या दान का सर्वोत्तम केन्द्र गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना कर देश को स्वतंत्र कराने वाले सिपाही पैदा किए जिन्होंने अपने शौर्य व पराक्रम से देश को स्वतंत्र कराने में अपना विशेष योगदान दिया। उन्होंने स्वामी श्रद्धानंद जी से प्रेरणा लेकर जीवन निर्माण का संकल्प दिलाया। गरुण ध्वज पाण्डेय मंत्री आर्य समाज नई बाजार बस्ती ने उपस्थित सभी आर्यों का आभार व्यक्त किया। इस सभा में उपस्थित लोगों ने भी अपने-अपने विचार दिए। मुख्य रूप से इस सभा में गणेश आर्य, अनूप तिवारी, दिनेश मौर्य, अमित कुमार, विकास बरनवाल, अरविंद श्रीवास्तव, राम तनय आर्य, श्रीमती राधा देवी, कुमारी मोहनी कसेरा, कुमारी नंदिनी कसेरा आदि उपस्थित  थे।

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