40 प्रतिशत सड़क हादसों के लिए एनरायड मोबाइल ज़िम्मेदार

मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ गाड़ी चलाते वक्त मोबाइल फोन पर बातें करना जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। मोबाइल पर बातें करते वक्त करीब 40 प्रतिशत तक सड़क हादसे हो रहे हैं। इसमें 99 प्रतिशत पुरुष व एक फीसदी महिलाएं चोटिल होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। यह खुलासा यातायात माह पर केजीएमयू ट्रॉमा सर्जरी विभाग के शोध में हुआ है।केजीएमयू ट्रॉमा सर्जरी विभाग ने अब तक 900 घायलों का ब्यौरा जुटाया है।


18 से 49 साल के घायलों को शोध में शामिल किया गया है। होश में अस्पताल पहुंचे घायलों से डॉक्टरों की टीम ने बात की। जिसमें घायलों ने मोबाइल पर बात करने की बात कुबूल की है। बेहोश या फिर अति गंभीर मरीजों को शोध में शामिल नहीं किया गया है। ट्रॉमा सेंटर के विभागाध्यक्ष डॉ. संंदीप तिवारी के अनुसार मोबाइल पर बात करने के अलावा लोग गाड़ी चलाते वक्त वाट्सएप का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। संदेश भेजते व पढ़ते हैं। ऐसे लोगों की संख्या करीब 10 प्रतिशत है। यह भी हादसे की बड़ी वजह बन गया है। बहुत से लोग पैदल चलते वक्त फोन पर बात करते हैं या वाट्सएप देखते हैं।


डॉ. संदीप तिवारी के अनुसार लोग मोबाइल में इतना मगन हो जाते हैं कि कब यह सड़क किनारे से बीच में पहुंच जाते हैं पता नहीं चलता। ऐसे में पीछे या आगे से आ रहे वाहन की चपेट में आ जाते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे 11 प्रतिशत घायल अपताल पहुंचे। उन्होंने बताया कि काफी लोग नशे में धुत्त होकर गाड़ी चलाते हैं। ये लोग खुद के अलावा दूसरे लोगों की भी जान जोखिम में डालते हैं। दो से तीन प्रतिशत लोग नशेड़ियों की वजह से अस्पताल पहुंच रहे हैं। सबसे ज्यादा हाथ-पैर के फ्रैक्चर, पेट व छाती में चोट लगे मरीज आ रहे हैं।


भीषण हादसे में सिर में चोट लगने की आशंका अधिक रहती है। तेज रफ्तार में गाड़ी चलाने का शौक भी जिन्दगी पर भारी पड़ रहा है। डॉ. के अनुसार सड़के पहले के मुकाबले बेहतर हुई हैं। हाईवे की संख्या में भी इजाफा हुआ है। ऐसे में लोगों के गाड़ियों की रफ्तार भी बढ़ी। मोबाइल पर बात करना और भी घातक हो गया है। दुखद यह है कि तेज रफ्तार में हादसा होने पर मल्टीपल इंजरी यानी कई अंगों में फ्रैक्चर हो रहा है।


वर्षों से सड़क यातायात की सुरक्षा पर जागरूक करने का काम करने वाले शुभम सोती फाउंडेशन के संस्थापक आशुतोष सोती ने बताया कि बार-बार मोबाइल देखने के दो कारण है। पहला सड़क पर चलने वाले बहुत सारे लोगों को मोबाइल देखने की अनावश्यक "लत" लग चुकी है। वह इसके गुलाम बन गये हैं। दूसरा मोबाइल देखने का लती भी यह जनता है कि सड़क पर कोई गलती किया तो दुर्घटना होगी। वह चाहता है कि मोबाइल झांकते हुये सड़क पर ध्यान बना कर रख ले, लेकिन पल भर के लिये वह इतनी एकाग्रता से मोबाइल देखने को दृष्टि बदलता है कि फिर जब तक वह कुछ समझ सके दुर्घटना उसके सामने खड़ी रहती है।


हर वर्ष हजारों लोगों को हेल्मेट बांटने वाले सोती ने बताया कि यदि दुर्घटना रोकने का कारगर उपाय कोई है तो उनमें से एक यह कि बच्चों को कक्षा 6 से सड़क सुरक्षा की जागरूकता पढ़ना चाहिये। दूसरा अभिभावकों को चाहिए कि जब बच्चा दो पहिया वाहन चलाने की शुरूआत करे तभी उस पर दबाव बना कर हेल्मेट लगवायें, कार चलाते वक्त सीट बेल्ट लगवायें, गाड़ी चलाते समय मोबाइल पर बात न करें, बात करना जरूरी हो तो गाड़ी किनारे रोककर ही बात करें, नशे में गाड़ी न चलाएं, रफ्तार कम ही रखें तथा यातायात नियमों का पालन करे।


 


 


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