नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्द्यालय का 45 दीक्षांत समारोह सम्पन्न,मेधावी हुए सम्मानित !

 


"कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज में मनाया गया 45 वां स्थापना दिवस"


 


* उत्कृष्ट कार्यों के लिए कर्मचारियों को सम्मानित कर दिया गया प्रशस्ति पत्र।


 


मिल्कीपुर, अयोध्या।


   आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज ने अपने स्थापना दिवस के 45 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट के प्रेक्षागृह में एक समारोह आयोजित किया। इस समारोह के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ बिजेंद्र सिंह ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का उद्घघाटन किया।


कोविड-19 की गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय के अन्य केंद्रों के वैज्ञानिक, शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र वर्चुअल मोड पर ऑनलाइन कार्यक्रम से जुड़े रहे। समारोह के विशिष्ट अतिथि डॉ आर सी श्रीवास्तव ,कुलपति, डॉ राजेंद्रा प्रसाद केंद्रीय विश्वविद्यालय, समस्तीपुर, बिहार ने "एनवायरमेंटल एंड एग्रीकल्चर सस्टेनिंग फ्यूचर फॉरवर्ड" विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान देते हुए जल संरक्षण ,भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रखने, स्वच्छ वातावरण तथा कृषि अपव्ययों का प्रयोग कर कार्बनिक खाद बनाए जाने पर विशेष जोर दिया


उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए विश्वविद्यालय के भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। समारोह के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ बिजेंद्र सिंह ने इस अवसर पर बताया कि वर्ष 1975 में विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद से शिक्षा, शोध एवं प्रसार के क्षेत्र में निरंतर अग्रसर रहा है।


कृषि महाविद्यालय, पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय, उद्यान महाविद्यालय, प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, होम साइंस महाविद्यालय, मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय एवं बायो टेक्नोलॉजी में शिक्षा, शोध हेतु मुख्यालय एवं विश्वविद्यालय के कार्यक्षेत्र जनपदों में 17 शोध प्रक्षेत्र जहां शोध एवं बीज उत्पादन, दो बीज विधायन केंद्र के साथ-साथ, प्रसार के क्षेत्र में 25 कृषि विज्ञान केंद्र एवं चार कृषि ज्ञान केंद्र कार्य कर रहे हैं। कुलपति ने बीते एक वर्ष के कार्य की उपलब्धि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विगत वर्ष में विश्वविद्यालय का एक्रिडेसन, छात्रों का ड्रेस कोड, सबसे पहले फाइनल वर्ष का परीक्षा परिणाम, शिक्षकों एवं कर्मचारियों का जीपीएफ ऑनलाइन ,2.45 करोड़ का बीज विक्रय ,239 हेक्टेयर में धान की फसल( गत् वर्ष से74 हेक्टेयर ज्यादा) निष्प्रयोज्य भूमि को मॉडल प्रक्षेत्र के रूप में विकसित करना तथा 14 कृषि विज्ञान केंद्रों में 3.25 करोड़ से मॉडल कृषि प्रक्षेत्र विकसित करने का कार्य किया गया।


भविष्य में 110 से 115 एकड़ निष्प्रयोज्य भूमि को विकसित किया जाएगा तथा एक 10 एकड़ क्षेत्रफल में मॉडल कृषि प्रक्षेत्र विकसित किया जाएगा। जहां मत्स्य पालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन ,मशरूम की खेती एवं अन्य कृषि से संबंधित समस्त जानकारियां एक ही स्थान किसान प्राप्त कर सकेंगे।


श्री सिंह ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों शिक्षकों एवं कर्मचारियों से आह्वान किया कि मेहनत एवं निष्ठा से कार्य करें जिससे विश्वविद्यालय भारतवर्ष के अग्रणी कृषि विश्वविद्यालयों में स्थापित हो सके। कुलपति डॉ सिंह ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय के एस पी चटर्जी, वित्त नियंत्रक कार्यालय, अमरनाथ यादव, कुलपति कार्यालय के शमशेर, कुलपति कार्यालय, राणा भूषण, चिकित्सालय, मंसाराम, प्रशासनिक कार्यालय एवं तनवीर खान, प्रसार निदेशालय को उनके उत्कृष्ट कार्य हेतु प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित


भी किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समस्त अधिष्ठाता ,कुलसचिव, निदेशक, वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहेे। विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि स्थापना दिवस पर विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं छात्रों द्वारा एक ऑनलाइन सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। जिसमें शिक्षा पर व्याख्यान, गिटार वादन, नृत्य ,भोजपुरी गीत एवं अन्य कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए । समारोह के समापन अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रसार निदेशक डॉ ए पी राव ने धन्यवाद प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम के संचालक डॉ सीताराम मिश्रा, डॉ जसवंत , समारोह समिति के सभी सदस्य, डॉ रूमा देवी, डॉ ऋषि कांत, डॉ समीर एवं सहयोगियों के योगदान के लिए धन्यवाद दिया। कार्यक्रम में डॉक्टर एके सिंह, राजबहादुर, डॉ उमेश चंद्रा एवं डॉ विजय किशोर सिंह आदि उपस्थित रहे।


 


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