अब कश्मीर की घाटी में अब्दुल्लाओं की दाढ़ी बढ़ने से रोकना होगा,ये रक्तबीज है।

फारुख अब्दुल्ला और महमूद मुफ़्ती जैसे लोग विरोधी और जहरीली बयानों से देश विशेषकर घाटी का माहौल खराब करने का काम कर रहे हैं।इन देश द्रोहियो पर केंद्र सरकार को कड़ी निगाह रखनी चाहिए। धारा 370 की समाप्ति के बाद शान होते माहौल को चढ़कर उसे बिगाड़ने का काम द्रोही मोर्चा कर रही है ,सरकार को खिलाफ अब्दुल्ला और मुफ़्ती का आतंकवादी बयान राधट्रीय है का खुला निमंत्रण है ।देश के सामने और देश के नरेतृत्व के सामने अपनी लोकतांत्रिक मगे रखने का अधिकार संविधान देता है पर याद रखें परंतु अनुशासन प्रतिबंध नहीं है सृष्टि नहीं मनमानी है ,सागर जल की बाढ़ नही है, नदी न विखरा पानी है ।


 अर्थात अति सर्वत्र वर्जित और और अब्दुल्ला और मुफ़्ती के ऊपर तुरंत राष्ट्र द्रोह का मुकदमा चलाकर देना चाहिए। इनकी वही दशा हो जो इनके पिता ने एक विधान एक संविधान एक प्रधान के वैचारिक संस्थापक भारतीय जनता पार्टी के वैचारिक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के लिए श्रीनगर की जेल में इन लोगों ने किया था ।इन लोगों का जितना भी अपराध है सब इकट्ठा करके सरकार को और केंद्र शासित सरकार को तनिक भी सँकोच नही करना चाहिए ।


ये कभी अलगाववाद की भाषा बोलते हैं ,कभी कभी पाकिस्तान की भाषा बोलते हैं ,कभी युएनवो की भाषा बोलते हैं और अब ऐसा बोलने के अभ्यासी होते चले जा रहे हैं ।आतंकवाफियो को समर्थं और भारत का विरोध इनकी नीति औऱ नियति दोनो है ।


 कश्मीर में राष्ट्रद्रोह को खुला निमंत्रण देने वाले इन नेताओं के खिलाफ आखिर कार्यवाही से सरकार को चुकना नहीं चाहिए सरकार को यह भी ध्यान में रखना चाहिए इनकी हरकतें राजनीति का जामा पहनाकर के राष्ट्र विरोधी हैं जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग करने वाले कश्मीर आधारित राजनीतिक इन बकरों के खिलाफ अब मोदी सरकार और केंद्र शासित सरकार को दाढ़ी बनाने से रोकना चाहिए ।अगर इनकी दाढ़ी कतरी नहीं गई तो आने वाला दिन बहुत बड़ा अन्याय होगा और एक नए अलगाववाद को जन्म देने का कारण बनेगा । इसलिए मेरा आग्रह है कि इनकी जो एलायंस है गठबंधन है उस पर सरकार को निगाह रखनी चाहिए 370 और 35a फिर से वापसी करने वाले कांग्रेस समर्थित इन नेताओं पर सरकार निगाह रखें और इनके विदेशी फंडिंग पर भी निगाह रखें ।


कांग्रेस और अब्दुल्लाह के व्यक्तिगत पारिवारिक रिश्तो पर भी निगाह रखें और जब तक के नहीं होगा तब तक यह दिमाग में आप निकाल दीजिए कि देश की अस्मिता को ये चुनौती देते रहेंगे और कभी भी आपकी बात को अनुनय विनय की बात नहीं मानेंगे ।


हमें इस गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए कि कश्मीर भारत का है भारत में अगर कहीं स्वर्ग है पृथ्वी पर अगर कहीं स्वर्ग है तो जमी अस्तो हमीं अस्तो हमीं असस्तो ।अर्थात कश्मीर में ही कश्मीर की वादियों में ही दुनिया का स्वर्ग बिराजता है दुनिया के स्वर्ग और नर्क बनाने वाले नियमों के खिलाफ कार्यवाही अगर मोदी जी आप नहीं करेंगे तो आने वाला समाज आपसे प्रश्न करेगा जब आपके पास पूर्ण बहुमत था श्रीनगर में भी आप की सरकार थी तब आप ने विषैले नागों का फन क्यो नही कुचलने के लिए काम नहीं किया ?आज शारदीय नवरात्र है शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था और आप अपने प्रतिनिधि को भेजे हुए हैं वहां अब सेना से कहिए कि वहाँ रक्त वीजो की संतानों को समाप्त करने के लिए वहां काली का रूप धारण करें और रक्त वीजो की समाप्ति कर वहां राज्य स्थापित करें । राज्य स्थापित नहीं होता है तो परिस्थितियां इतनी भयानक होंगी जो कभी नहीं जैसे होंगी ।


23 लाख कश्मीरी पंडितों को विस्थापित करने के बाद मौज मनाने वाले लोग असखिर को हैं ? वह सिर्फ भारत के विरोध में बोलकर घाटी से लेकर के श्रीनगर तक केवल एक ही काम करना कि जो भारत सरकार का प्रतिनिधि हो उसके खिलाफ आवाहन करो ।डिवाइड एंड रूल की पालिसी अपनाओ ।और अंत में जा करके अधिक से अधिक सुविधाएं ले लो चाहे वह फारूक अब्दुल्ला रहे, चाहे उमर अब्दुल्ला रहे ,चाहे महबूबा मुफ्ती रहे ,चाहे मीरवाइज रहे चाहे उमर फारूक रहे या कोई और भी रहे हो सब की एक ही गति है कि भारत के खिलाफ विष वमन करके भारत को धमका करके अधिक से अधिक दोहन करके सुविधाओं को इकट्ठा करना अपनी संतानों को श्रीनगर के बजाय लंदन में पढ़ाएंगे ।हम ₹40 किलो चीनी लेते हैं और सरकार उनको ढाई रुपए किलो चीनी वहां उपलब्ध कराती है ,नरेंद्र मोदी ने कहा है कि हिंदूकुश से हिंद महासागर और सोमनाथ से काम रुप तक का जो अखंड भारत है उसमें किसी भी व्यक्ति को आतंकवादी गतिविधियों चलाने और भारत के खिलाफ दिल्ली के तख्त के खिलाफ राष्ट्रद्रोह आंख से देखने की नौबत आएगी तो उसकी आंख निकाल लेंगे।


 और इन लोगों को यह भी सीख देनी चाहिए कि अब वह दिन लद गए जब मनमोहन सिंह जी कहते थे इस देश के संसाधनों पर केवल मुसलमानों का पहला हक है। देश का हर नागरिक भारतीय है चाहे काश्मीर का हो, चाहे कामरूप का हो ,चाहे सोमनाथ का हो ,चाहे श्रीनगर का हो ।अब अबाध सर्वत्र जा सकता है ,आ सकता है ,जमीन ले सकता है, खरीद सकता है, बस सकता है, व्यापार कर सकता है और परमिट व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है ।


परंतु कांग्रेस ने भी इस बात पर सहमति जताई है कि आने वाले दिनों में हम धारा 370 और 35a को फिर से लाने का प्रयास करेंगे जो एक तरह से दिवास्वप्न है एक अधकचरा कांग्रेसका उत्तराधिकारी नरेंद्र मोदी जैसे मनीष योगी और विदेह से मुकाबला करने चला है ,जो कभी भी संभव नहीं है ,जैसे कोई बौना फल प्राप्त करना चाहें उसी तरह से कांग्रेस राहुल के नेतृत्व में प्रधानमंत्री का ख्वाब देख कर के अपने को आत्म संतोष कर रही है 


इसलिए मेरा आपसे आग्रह है कि आने वाला दिन इन अब्दुल्ला के लिए खतरनाक बने और मां दुर्गा केंद्र सरकार को इतनी शक्ति और विवेक दें कि उन कार्यों से आतंकवादियों से विवेक आसके और अनावश्यक रूप से समाज में नफरत पैदा करने वाले लोगों के खिलाफ कार्यवाही करें ।


और कार्यवाही उनके खिलाफ करें जो दिल्ली की गद्दी और देश की संघीय व्यवस्था के खिलाफ आवाहन करते हैं राष्ट्र द्रोह को खुला आमंत्रण देते हैं ।उनको यह नहीं मालूम है कि केंद्र में नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के और भारतीय जनता पार्टी के विचारधारा की सरकार है एक पत्रकार के नाते मेरा अब्दुल्ला और मूफ़्ती से सादर अनुरोध है कि अभी आप समझ जाइए, आपको भारत सरकार के संविधान में ,भारत सरकार की नीति में, भारत सरकार की रीति , में भारत सरकार की व्यवस्था में ,यहां की आईपीसी में यहां के सीआरपीसी में ,यहां के कांटेक्ट में ,यहां के ट्रांसफर आफ प्रॉपर्टी एक्ट में इन सब में आपको विश्वास रखना चाहिए ।अगर आपने 2019 के पहले का सपना देखा तो दिवास्वप्न था । अब उस सपना देखना बंद करिए जितनी जल्दी हो सके इस देश की मुख्यधारा में आकर विपक्ष की भूमिका निभाते हुए जितना अधिकतम लोकतांत्रिक तरीके से केंद्र सरकार का विरोध कर सकते हो करिए, लेकिन राष्ट्रद्रोह करने वाले को मोदी सरकार को तुरंत कुचलने से तनिक भी संकोच नहीं करना चाहिए ।


फारूक अब्दुल्ला कितना भी लीपापोती करें उनको ईडीबीके माध्यम से किसी भी प्रकार से सीख देने की बात आए वह सब बेकार है । नेशनल कांफ्रेंस और पीपुल्स पार्टी के नेताओं के भारत विरोधी और पाकिस्तान एवं चीन समर्थकों से साफ है कि उनकी विचारधारा एक तरह से आतंकी और नक्सलियों जैसी है एक तरह से यह नव नक्सली हैं। अभी भी भारत की निष्ठा में, भारत की मानसिकता में, भारत के संविधान में ,विश्वास नहीं कर सकते ।इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि इन दोनो के लिए जम्मू कश्मीर का मतलब केवल घाटी है ।


इन दोनों के लिए जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती का झंडा एवं संविधान लौटाने की मांग अलगाववाद को आमंत्रण करना है कश्मीर का झंडा लेकर हाथ में अलगाववाद को एक तरह से देश के साथ सीधा-सीधा टकराने का आवाहन है। पुरानी व्यवस्था बहाल होने तक चुनाव प्रक्रिया में भाग नहीं लेंगे उनका कहना है परंतुयह केंद्र से गीदड़ भभकी सेआने से कोई समस्या हल नहीं होगी ।


 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ी सावधानी पूर्वक इन अलगाववादी नेताओं के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि दुनिया की कोई भी ताकत धारा 370 और 35a की वापसी नहीं ला सकती ।इसलिए जो लोग धारा 370 और 35a की तरफदारी कर रहे हैं देश के किसी भी भाग के हो उन सारे लोगों को राष्ट्रद्रोह की भूमिका में उनके खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए । स्पष्ट है कि जैसे नेता अपने जहरीले राष्ट्र विरोधी बयानों से कश्मीर का माहौल खराब करने का जो काम कर रहे हैं ,उन पर अबतक गतिविधियों पर अंकुश लगना चाहिए था ।


 अगर या नहीं हुआ तो महबूबा मुफ्ती फारूक अब्दुल्ला पर कई साल पहले देशद्रोह का आरोप लग जाना चाहिए था ।यही कश्मीर घाटीमें इन लोगों खिलाफ कभी कोई कार्यवाही नहीं की कीगई ,मनबढा है। इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि सारे देश के लोगों को कश्मीर में बसाया जाए और कश्मीर हर हालत में भारत का अभिन्न अंग है ।यह संवैधानिक व्यवस्था है ।जो लोग अलगाववादी शक्तियों के साथ देश के अन्य हिस्से के लोग राजनीति को सामाजिक लोग खड़े हैं उन्हें भी अपना रावलपिंडी, लाहौर जा करके आवास लेना चाहिए ।


 हिमालय से लेकर के हिंद महासागर क्षेत्र भारतवर्ष का है ,भारतवर्ष के लोगों का है या किसी भी प्रकार का अलगाववाद नहीं चलेगा ,अब तक जो चला बहुत हो चुका अब आने वाले दिनों में ,नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जो सरकार है सरकार में किसी भी प्रकार की नीति को अपनाकर के हर हाल में आतंकवादियों और बागियों से निपटना चाहिए । यह बहुत अच्छी बात नरेंद्र मोदी के मंत्री कह दिया कि देश के लोग कश्मीर में जाकर के जमीन खरीद सकते हैं, यह भी अलगाववादी के मन को कटे पर नमक जैसा है ।और वहां संपूर्ण देश के सैनिकों को ,पूर्व सैनिकों को , जो भी बसना चाहे उन सारे लोगों को केंद्र और केंद्र शासित सरकार को व्यवस्था देनी चाहिए । वहां नए कल कारखाने लगाने के लिए अनुकूल माहौल तब जाकर के भारत में फिर से राज्य की स्थापना हो सकती है और नेताओं को जबान पर लगाम लगाई जा सकते हैं जय हिंद!!



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