ये हैं !राजधानी लखनऊ के अस्पताल! 4 प्राइवेट अस्पतालों में 48 कोविड मरीज भेजे गए 48 सो की मृत्यु !

लखनऊ के 4 निजी कोविड अस्पताल बने कत्लगाह!


 


इन अस्पतालों में भेजे गये 48 के 48 मरीज मरे


 


 


मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ। राजधानी के चार बड़े निजी अस्पतालों में अब तक 48 मरीज हुए भर्ती हुये थे। हैरान करने वाली बात यह है कि सभी भर्ती रेफर मरीजों की इन अस्पतालों में उपचार के दौरान मौत हो गयी। प्राप्त विवरण के अनुसार चरक अस्पताल में 10 संक्रमित भेजे गये थे, चंदन हॉस्पिटल में 11 कोरोना संक्रमित भेजे गये थे, अपोलो हॉस्पिटल में 17 कोविड संक्रमित भेजे गये थे और मेयो हॉस्पिटल में 10 मरीज कोरोना मरीज भेजे गये थे। इन अस्पतालों में गये मरीज जिंदा वापस नहीं आ सके। बता दें कि अपने राजनैतिक और नौकरशाही संबंधों के कारण ये अस्पताल किसी भी सरकार और प्रशासन पर भारी पड़ते रहे हैं।


इन अस्पतालों में मरीजों पर मरीजों से मनमाना पैसे वसूलने व दुर्व्यवहार करने के अनेक आरोप लगते रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार शहर के चार निजी अस्पतालों में होम कोरेन्टीन में रह कर गंभीर हुये ऐसे मरीज जो भारी फीस देकर अपना अच्छा इलाज कराने के लिये इन नामी-गिरामी अस्पतालों में भर्ती हुये थे। कुल 48 कोरोना संक्रमित इन चारों अस्पतालों में रेफर और भर्ती किये गये थे। इन अस्पतालों में मरीजों को समय पर न जांच हुई, न ही इलाज मिल पाया। जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने बताया कि सभी अस्पतालों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा गया है। ये बहुत आश्चर्यजनक बात है कि सभी 48 कोरोना मरीजो की मौत तब हो गयी जब देश में संक्रमितों के स्वस्थ होने की दर लगातार बढ़ रही है।  इसमें लापरवाही बरतने वाली निजी अस्पतालों के खिलाफ ऐपिडेमिक ऐक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दे दिया गया है। इन पर सख्त कार्रवाई भी होगी।


बता दें कि केंद्र सरकार की गाइडलाइंस है कि अस्पतालों में आने वाले सामान्य मरीजों की भी पहले कोरोना जांच होनी चाहिए। जानकारी के मुताबिक, कई जगह मरीजों की कोरोना जांच नहीं करवाई गई और उन्हें भर्ती कर लिया गया। बाद में मरीज की तबीयत बिगडऩे पर कोरोना जांच करवाई गई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। ऐसा सभी अस्पतालों ने रुपये के लालच में किया है। मोटा रुपये कमाने के चक्कर में मरीजों को भर्ती कर लिया और इलाज में लापरवाही की जिसकी वजह से ही सभी की मौत हो गई।इसके अलावा कई अस्पतालों में संक्रमितों को शिफ्ट करने में देरी के भी मामले सामने आए। जिलाधिकारी ने बताया कि प्रथमदृष्टया मरीजों की जांच में लापरवाही सामने आई है। इस पर अस्पतालों से जवाब मांगा गया है। अस्पतालों से पूछा गया है कि आखिर क्या वजह है कि अब तक भेजे गए सभी कोविड संक्रमितों की मौत हो गई। 


       


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