उत्तरप्रदेश में धर्मान्तरण विरोधी कानून की तैयारी,

लखनऊ


उत्तर प्रदेश में बढ़ते लवजिहाद से चिंतित उत्तर प्रदेश सरकार धर्मांतरण विरोधी कानून लाने कर तैयारी में है।आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि इस सिलसिले में अन्य राज्यों में लागू अधिनियमों का परीक्षण किया जा रहा है और नया अध्यादेश उसी की तर्ज पर आयेगा। अरूणाचल प्रदेश ओडीशा मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड और उत्तराखंड में फिलहाल धर्मांतरण विरोधी कानून लागू है। देश में ओडीशा पहला राज्य है जिसने यह कानून 1967 में लागू किया था। जिसके अगले साल 1968 में मध्यप्रदेश में इसका अनुसरण किया। सूत्रों ने बताया कि राज्य विधि आयोग ने पिछले साल धर्मान्तरण जैसे गंभीर मसले पर नया कानून बनाने की सिफारिश की थी। आयोग का मत है कि मौजूदा कानूनी प्रावधान धर्मान्तरण रोकने के लिए पर्याप्त नहीं हैं और इस गंभीर मसले पर दस अन्य राज्यों की तरह नये कानून की आवश्यकता है।


हाल ही में कानपुर और मेरठ, शामली, मुजफ्फरनगर, नोयडा, बुलंदशहर, बदायूं और सहारनपुर में 'लव जेहाद' के बढ़ते मामलों के मद्देनजर योगी आदित्यनाथ सरकार ने नये कानून को अमल में लाने की दिशा में गंभीरता से विचार किया है। अकेले कानपुर में 21 दिन में लवजिहाद के 12 मामले पुलिस के पास आ चुके हैं। दोका सामना में छपे इस खबर का राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी लिया था। हाल ही में जब भागवत कानपुर और लखनऊ दौरे पर आये थे तब उन्होंने धर्मांतरण के मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त किये थे। धर्मांतरण विरोधी कानून को लेकर कई राज्यों में गंभीर मंथन जारी है


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