टैगोर का जन्म दिन मना

कौटिल्य वार्ता
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गुरूदेव टैगौर का जन्मदिन मनाया गया
जौनपुर । जिले के सरांवा गाव में स्थित शहीद लाल बहादुर गुप्त स्मारक पर आज हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकंन आर्मी व् लक्ष्मीबाई ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने नोबेल पुरस्कार विजेता और विश्व भारती विश्व विद्यालय के संस्थापक गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर का 159 वां जन्मदिन मनाया।                        इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने शहीद स्मारक पर गुरुदेव के चित्र पर माल्यार्पण किया और उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला गया। शहीद स्मारक पर उपस्थित लोगो को संबोधित करते हुए लक्ष्मीबाई ब्रिगेड की अध्यक्ष मंजीत कौर ने कहा कि गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर का जन्म सात मई 1861को तत्कालीन कलकत्ता व वर्तमान में कोलकाता में हुआ था । उन्होंने कहा कि नोबेल पुरस्कार विजेता श्री टैगोर ने भारत के राष्ट्रगान की रचना की ,वहीं शांति निकेतन में विश्व भारती विश्व विद्यालय की स्थापना कर शिक्षा को बढ़ावा दिया । उन्होंने कहा कि शांति निकेतन का मानवता सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है ।  उन्होंने कहा कि गुरुदेव का कहना था कि शिक्षा से ज्ञान बढेगा और लोग विवेकवान होंगे ,मगर आज दुःख इस बात का है कि आज की शिक्षा ऐसी हो गयी है कि उसका वर्णन करना बहुत मुश्किल ही नही , कठिन भी है ।  उन्होंने कहा कि गुरुदेव श्री टैगोर महान लेखक , विचारक , स्वतंत्रता सेनानी और बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्तित्व वाले महापुरुष थे , उन्होंने अपनी लेखनी से देश व समाज को बहुत कुछ दिया है ।  उन्होंने कहा कि देश के आजादी की लड़ाई के दौरान गुरुदेव ने दो गीत चित्तो जेठा भयशून्यों ( मन डर के बिना ) और एकला चलो रे ( अकेले चलो ) बहुत प्रचलित हुए । देशवासी  ही नही ,अंग्रेज सरकार भी उनका बहुत सम्मान करतीं थी  , लेकिन श्री टैगोर ने अंग्रेज सरकार द्वारा दी गयी नाईट की पदवी को जलियावाला बाग नरसंहार के विरोध में लौटा दिया था । सुश्री कौर ने कहा कि गुरुदेव को पहला नोबेल पुरस्कार 1913 में उनकी पुस्तक गीतांजलि की रचना के लिए मिला था । सब कुछ करते और देश व समाज को देखते हुए सात अगस्त 1941 को गुरुदेव इस संसार से हमेशा के लिए चले तो गए , मगर उनकी कृतियां व कर्म उन्हें आज भी जीवित किये हुए हैं ।  इस अवसर पर धरम सिंह , अनिरुद्ध सिंह ,  अनिरूद्ध सिंह, मैनेजर पांडेय , मंजीत कौर सहित अनेक लोग मौजूद रहे।


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