आशाओ से निराश कलक्टर ने,93 आशाओं को बरखास्तगी का दिया आदेश!

कौटिल्य वार्ता
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आखिर आशाएं ही दोषी क्यों?सी एम् ओ की टीम का कोई दोष नहीं?

बस्ती 29 जनवरी 

पिछले 6 माह में 93 आशाओ द्वारा एक भी डिलेवरी ना कराने पर उनकी सेवा समाप्ति के लिए जिलाधिकारी श्रीमती प्रियंका निरंजन ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में उन्होंने निर्देश दिया कि इन सभी आशाओं को नोटिस जारी की जाएगी तथा इसके पश्चात ग्राम पंचायत द्वारा इनकी सेवा समाप्ति कर नए का चयन किया जाएगा। इस संबंध में उन्होंने डीपीआरओ को भी कार्यवाही करने का निर्देश दिया है। जिलाधिकारी ने सीडीओ की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है, जिसमें सीएमओ तथा एसीएमओ सदस्य होंगे। यह समिति बर्खास्तगी की जद में आई आशाओं के प्रत्यावेदन की सुनवाई करके उसका निस्तारण करेगी।
        जिलाधिकारी ने हर्रैया एवं रुधौली के बाद भानपुर एफआरयू में ऑपरेशन शुरू होने पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को बधाई दिया तथा इसी क्रम में बहादुरपुर में भी एफआरयू शुरू करने का निर्देश दिया।
        समीक्षा में जिलाधिकारी ने पाया कि मरवटिया, दुबौलिया, गौर तथा परसरामपुर सीएचसी विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में काफी पिछड़ा हुआ है। उन्होंने सीएमओ को निर्देशित किया कि माह में एक बार गौर सीएचसी का निरीक्षण अवश्य करें तथा वहां के कार्यों में सुधार लाएं। इसके अलावा अन्य तीनों सीएचसी के नोडल एसीएमओ प्रत्येक माह सीएचसी का निरीक्षण कर इंप्रूवमेंट लाए। समीक्षा में उन्होंने पाया कि 13 पीएचसी पर परिवार नियोजन की कोई सुविधा नहीं उपलब्ध कराई जा रही है तथा स्टाफ की अनुपलब्धता के बारे में कई एमओआईसी द्वारा बताया गया। इस संबंध में जिलाधिकारी ने सीएमओ को निर्देशित किया है कि वे समीक्षा करके कमियों को दूर कराएं।
        उन्होंने पिछली बैठकों में दिए गए निर्देश के क्रम में ब्लॉकों द्वारा संबंधित सीएचसी/पीएचसी पर पुनरुद्धार कार्यों की समीक्षा किया। हर्रैया में उच्च क्षमता का ट्रांसफार्मर लगाने के लिए धन हेतु राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, लखनऊ को स्टीमेट भिजवाने के लिए निर्देशित किया। स्वास्थ्य सेवाओं की फीडिंग में आ रही दिक्कतों के मद्देनजर जिलाधिकारी ने सभी 16 कंप्यूटर ऑपरेटर के कार्यों की समीक्षा करने का निर्देश दिया, यदि वे अपने कार्य से अनुपस्थित रहते हैं या समय से फीडिग पूरी नहीं करते हैं, तो उनके मानदेय में कटौती करने के लिए जिलाधिकारी ने निर्देशित किया है। कार्य में शिथिलता पाए जाने पर इनकी संविदा भी समाप्त की जा सकती है।
         जिलाधिकारी ने निर्देश दिया है कि जननी सुरक्षा योजना के तहत लाभार्थियों को भर्ती के दौरान भोजन उपलब्ध कराने के लिए महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा प्रेरणा कैंटीन संचालित की जाए। भोजन में गुणवत्ता की कमी पाये जाने पर नए स्वयं सहायता समूह को मौका दिया जाए। इस संबंध में उन्होंने उपायुक्त एनआरएलएम रामदुलार को तत्काल कार्यवाही कराने का निर्देश दिया है।
        उन्होंने निर्देश दिया कि सभी 104 आशा संगिनी का रोस्टर जारी करें, ताकि भ्रमण करके सभी 2225 आशाओं के कार्यों की मॉनिटरिंग कर सकें। समीक्षा में उन्होंने पाया कि गर्भवती महिलाओं का रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर नहीं हो पा रहा है। इसको अभियान चलाकर पूरा करने का उन्होंने निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि ई-कवच पोर्टल पर दर्ज ड्यूलिस्ट ही मान्य होगी और इसके अनुसार कार्य किया जाए।
       समीक्षा में उन्होंने पाया कि सीएचसी/पीएचसी ओपीडी में पर्याप्त संख्या में मरीज नहीं देखे जा रहे हैं तथा डॉक्टर समय से नहीं पहुंच रहे हैं। इस पर उन्होंने असंतोष व्यक्त करते हुए निर्देश दिया कि शासन के निर्देशानुसार ओपीडी में मरीजों की देखने की संख्या बढाई जाए, डॉक्टर समय से बैठे तथा उपलब्ध कराई गई दवाएं मरीजों को दें, बाहर की दवा कदापि ना लिखी जाए। समीक्षा में उन्होंने पाया कि बर्थ डिफेक्ट्स वाले बच्चों की संख्या भी बहुत कम है। ऐसे बच्चों को ओपीडी में ही चिन्हित करके समुचित इलाज के लिए रेफर किया जाए।
      जिलाधिकारी के निर्देश पर सभी सीएचसी में आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों के लिए 5 बेड आरक्षित किए गए हैं। यहां पर आरक्षित का बोर्ड भी लगाया गया है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों एवं आंगनबाडी केंद्रों के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है। बैठक का संचालन डीपीएम राकेश पांडे ने किया। बैठक में सीडीओ डॉ. राजेश कुमार प्रजापति, सीएमओ डॉ. आरपी मिश्रा, डीडीओ अजीत कुमार, पीडी कमलेश सोनी, एसीएमओ डा. फखरेयार हुसैन, डॉक्टर ए.के. गुप्ता, डीआईओ डॉ. विनोद कुमार, डॉ. एके कुशवाहा, डॉ. एस.बी. सिंह, खंड विकास अधिकारी, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी तथा विभागीय अधिकारी गण उपस्थित रहे।

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